जज का काम इंसाफ करना तो है ही, लेकिन कुछ लोग अपने इस काम के साथ ही समाज के लिए कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिसके चलते वे मिसाल बन जाते हैं। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराधों को देख कुछ ऐसा ही किया जस्टिस दया चौधरी ने। महिलाओं के प्रति अपराधों को रोकने के लिए स्वयं संज्ञान लेकर इन मामलों को जनहित याचिका के तौर पर सुनने का निर्णय लिया।
हमारे समाज में यह क्या हो रहा है, महिला अपराधों को रोकने के लिए सख्त कानून होने के बावजूद भी रेपिस्ट महिलाओं को तो दूर बच्चियों, वृद्ध व मनोरोगियों को भी नहीं बख्श रहे। आखिर क्यों रेपिस्ट इस बात को नहीं समझते कि एक कातिल तो शरीर को नष्ट करता है लेकिन रेप पीड़िता की आत्मा को तबाह करके रख देता है।
हर रोज 55 महिलाओं की आबरू तार-तार कर दी जाती है और साल भर में आंकड़ा 20 हजार को पार होता है। आखिर क्यों समाज यौन अपराधों के प्रति उदासीन है। बढ़ती रेप की घटनाओं पर इन्हीं टिप्पणियों के साथ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की जस्टिस दया चौधरी ने संज्ञान लेते हुए हरियाणा, पंजाब व यूटी के गृह सचिव के सामने 23 सवाल रखते हुए उनसे जवाब तलब किया।