सबसे युवा आईएएस कृति गर्ग, एसीपी पूर्णिमा को सेल्यूट
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सोचा भी नहीं था कि जिस शहर में पली-बढ़ी, उसी शहर में आईएएस बनकर सेवा करने का मौका मिलेगा। इस सपने को संजोने के लिए बहुत सी रातों की नींद खोई है। लेकिन मन में कुछ कर गुजरने के जज्बे ने मंजिल को इतनी करीब ला दी कि आईएएस बनने के बाद पहली ज्वाइनिंग अपने शहर में ही मिली। आईएएस कृति गर्ग की कुछ ऐसी ही प्रेरणा दायक कहानी है।
कृति गर्ग (27) शहर की सबसे युवा आईएएस अफसर हैं। कृति ने पहले प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा में ऑल इंडिया लेवल पर 80वां रैंक हासिल किया। 2013 बैच की आईएएस कृति गर्ग इन दिनों यूटी में एसडीएम साउथ हैं। कृति ने बताया कि महिलाएं हर काम में सक्षम हैं और बोझ तो बिल्कुल नहीं है। वह हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। कृति से पहले उनकी बहन तन्वी गर्ग भी शहर में एसडीएम रह चुकी हैं। उनके नक्शे कदम पर ही कृति ने मंजिल हासिल की। दोनों बहनों ने समाज में बेटियों की अहमियत को नई दिशा दी है।
कृति ने बताया कि अपने शहर में एसडीएम लगने के बाद उन्हें खुशी तो हुई ही, साथ में जवाबदेही का भार भी बढ़ा। इसे बखूबी निभा रही हैं। किसी को भेदभाव का एहसास न हो, इसलिए मेरिट आधार पर केस निपटा रही हैं। उनका फोकस शहर को साफ-स्वच्छ और अतिक्रमण मुक्त बनाने का है। कृति गर्ग ने बताया कि युवाओं को अपना लक्ष्य निर्धारित कर उस पर फोकस करना चाहिए। इसके लिए अभिभावकों का साथ बेहद जरूरी है। उन्हें विश्वास में लेना चाहिए।
चिल्ड्रंस फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत में अहम रोल
डीसी अजीत बालाजी जोशी के मार्गदर्शन में पहला चिल्ड्रंस फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ कराने में एसडीएम कृति गर्ग का अहम रोल रहा। उन्होंने सभी मल्टीप्लेक्स और सिनेमा मालिकों से लगातार बैठक कर उन्हें विश्वास में लिया और बच्चों की जिंदगी में मल्टीप्लेक्स में फिल्म देखने का अनोखा अनुभव जोड़ा। इसकी सभी ने सराहना की।
मेरे सामने दो चुनौतियां : पूर्णिमा
वर्ष 2012 में हरियाणा पुलिस में ज्वाइन करने वाली एसीपी पूर्णिमा सिंह एक जुझारू पुलिस अफसर हैं। पंचकूला में ज्वाइन करने के बाद उन्होंने यहां की महिलाओं के भीतर छुपा हुआ डर निकालने के लिए कंपेन चलाईं। ‘वाक इन द डार्क’ एक खास कंपेन रही। अब उनके लिए दो चुनौतियां एक साथ हैं। पारिवारिक कर्तव्य और पुलिस की ड्यूटी। उनका 15 महीने का बेबी है पर ड्यूटी तो ड्यूटी है। सुबह आठ बजे घर से निकलने का समय तो तय है, लेकिन लौटने का समय तय नहीं। वह स्टूडेंट्स को पुलिस फोर्स ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।