वुमेन इंफर्टिलिटी और यौन रोग का डाइग्नोज व इलाज अब आसान हो जाएगा। इन रोगों पर अब बेहतर तरीके से नजर रखी जा सकेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पीजीआई में रीजनल सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) ट्रेनिंग रिसर्च एंड रेफरेंस लैबोरेटरी खोलने जा रही है।
मंत्रालय की ओर से इसकी परमिशन आ चुकी है। यह चंडीगढ़ के साथ हिमाचल, हरियाणा, पंजाब राज्य को भी कवर करेगी। लेबोरेटरी का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। अधिकारियों ने संभावना जताई है कि इसकी ओपनिंग अगस्त के दूसरे हफ्ते में हो सकती है।
लेबोरेटरी को लेकर डाक्टर काफी उत्साहित हैं। उनका कहना है कि यह पीजीआई के लिए तो बड़ी उपलब्धि है, साथ ही पेरीफेरी के उन डाक्टरों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी, जो एसटीआई से संबंधित रोगों की जांच नहीं कर पा रहे थे।
देश में अभी छह लैबोरेटरी
पूरे देश में अभी सिर्फ छह लैबोरेटरी हैं। पीजीआई में खुलने के साथ ही इनकी संख्या सात हो जाएंगी। इस रीजन में सेक्सुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन (एसटीआई) के केसों में लगातार इजाफा हो रहा था। इंफेक्शन से एड्स व इंफर्टिलिटी के केसों में भी बढ़ोतरी हो रही थी।
खास बात यह है कि इन बीमारियों के 70 प्रतिशत मामलों में लक्षण सामने नहीं आते। इसलिए डाक्टर बीमारियों को डाइग्नोज नहीं कर पाते। डाइग्नोज नहीं होने पर महिलाएं पहले अल्सर और फिर एचआईवी से पीड़ित हो जाती है।
अब रोगों पर नजर भी रखी जा सकेगी
डाक्टरों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी: इस सेंटर के खुलने से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि यहां पर डाक्टरों व स्टाफ को ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जाएगी। पीजीआई के डाक्टरों को छोड़कर आसपास के अन्य प्रदेशों में डाक्टर इन बीमारियों को डाइग्नोज नहीं कर पाते। इससे स्थिति और गंभीर हो रही थी। मरीजों की मौत हो रही थी। सबसे बड़ी बात इंफेक्शन के रेट में बढ़ोतरी आ रही थी।
रिसर्च व ट्रेनिंग सेंटर खुलने का एक सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इससे रोगों को सर्विलांस कर पाएंगे। कम्युनिटी में जाकर पता लगा पाएंगे कि किस एरिया में इसका प्रीवलेंस रेट बढ़ रहा है।
क्या होती है सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन
इसे यौन जनित रोग भी कहते हैं। इनमें मुख्य रूप से एड्स, सिफलिस, क्लैमीडिया, गानोरिया सहित अन्य बीमारियां हैं। यौन संबंध बनाने के दौरान पुरुषों से महिलाओं में या महिलाओं से पुरुषों में ये बीमारियां आ जाती हैं।
ये रोग उन लोगों में सबसे ज्यादा होने की संभावना होती है, जो अलग-अलग पाटर्नर के साथ सेक्सुअली एक्टिव होते हैं और बिना सुरक्षा के यौन संबंध बनाते हैं। इन बीमारियों के वायरस मुख, गुदा व यौनि से जा सकते हैं।