कहते हैं क्रांति की शुरुआत करने से पहले खुद उस क्रांति का हिस्सा बनना पड़ता है। घर से क्रांति की लौ जलानी पड़ती है, समाज को वापस लौटाना भी पड़ता है। इस परिपाटी पर खरी उतर कर समाजसेवा के क्षेत्र में एक बड़े नाम के रूप में उभरी हैं नेहा मित्तल। समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाने से पहले नेहा मित्तल को भी घर में ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शादी के बाद नए घर आई तो घूंघट प्रथा से सामना हुआ। लेकिन नेहा को महिलाओं के हालात बदलने थे, सो शुरुआत घर से की।
घर की महिलाओं और पुरुषों को घूंघट प्रथा हटाने के लिए मनाया। घूंघट प्रथा से छुटकारा मिला तो घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। नेहा बताती भी हैं कि मेरा घर से बाहर जाना पसंद नहीं था लेकिन मैंने इसका रास्ता खोजा।
मैं जरूरतमंदों महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर और आत्मरक्षा के लिए ट्रेनिंग देने का काम घर पर ही शुरू कर दिया। मेरी लगन देखकर घर के पुरुषों को भी मुझ पर विश्वास जागा और उनके विश्वास की बदौलत आज मैं समाज में अपना एक अलग मुकाम बना सकी हूं। नेहा कई संस्थाओं की सदस्य हैं और लड़कियों व महिलाओं के लिए स्वयं रोजगार कोर्स भी चला रही हैं।
दंपति को पिता ने गुंडों से बचाया तो जागा जज्बा
नेहा को समाज सेवा का जज्बा पिता सुंदर श्याम अग्रवाल से मिला है। छोटी थी तो पिता के साथ मार्केट जा रही थी। रास्ते में कुछ गुंडों ने एक दंपति पर हमला कर दिया। पिता ने गुंडों का सामना करते हुए दंपति को बचाया। यहीं से प्रेरणा मिली कि मैं भी कुछ करूं। शादी के बाद पति सुरेंद्र मित्तल ने हौसला बढ़ाया और मैंने अपने समाज सेवा का काम घर से शुरू किया।
इन संस्थाओं व समाज से जुड़ी हैं नेहा
अग्रवाल वैश्य समाज कार्यकारी प्रदेशाध्यक्ष हरियाणा
वरिष्ठ उपाध्यक्ष अग्रवाल वैश्य महासम्मेलन हरियाणा
जिला अध्यक्ष अग्रोहा विकास ट्रस्ट
डायरेक्टर सर्व संकल्प रोजगार केंद्र
वाइस प्रेसीडेंट भारत विकास परिषद
सदस्य रोटरी कल्ब
चेयरमैन कराटे वुशू एसोसिएशन
प्रेजीडेंट अग्रवाल सम्मेलन
उल्लेखनीय योगदान के लिए होंगी सम्मानित
महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय कामों के चलते प्रदेश सरकार 9 मार्च को नेहा मित्तल को इंदिरा गांधी महिला शक्ति अवॉर्ड से सम्मानित करेगी। इससे पहले मंत्री कविता जैन रोहतक में, पूर्व विधायक सावित्री जिंदल से अग्रोहा में सम्मानित हो चुकी हैं। जिला प्रशासन की तरफ से 15 अगस्त 2015 को सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
महिलाएं अपनी रक्षा खुद कर सकें इसके लिए सेल्फ डिफरेंस कोर्स चल रहे हैं। दूसरा यह है कि महिलाएं व लड़कियां खुद के पैरों पर खड़े हो सकें किसी का मुंह न ताकना पड़े, इसके लिए विभिन्न प्रकार के कोर्स करवा रहीं हूं। जब लड़कियां यहां से सीख अपना रोजगार शुरू करती हैं तो दिल खुश होता है। नोडल सैल के जरिए टूटते घरों को भी बसाया है। मैं तो ये ही कहूंगी कि उड़ान हौसलों से होती है, पंखों से नहीं, करने का जज्बा होना चाहिए मंजिल खुद मिल जाती है। नेहा मित्तल, समाजसेवी