चंडीगढ़ में साड़ी पहनकर साइकिल चलातीं महिलाएं
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साइकिल गिरी ग्रुप की महिलाएं रविवार को परंपरागत परिधान साड़ी में चंडीगढ़ की सड़कों पर साइक्लिंग करने निकलीं। तीस महिलाओं का यह समूह सुबह 5:30 बजे किसान भवन, छह बजे के करीब सुखना लेक से होते हुए सेक्टर-16 के अंडरपास तक गया। वहां सभी एकत्रित हुए और महाराष्ट्रीयन गाने पर डांस किया।
इस राइड में कोई भी महिला हिस्सा ले सकती थी। रविवार को छह-सात महिलाएं ऐसी थीं जिन्होंने 25-30 साल के बाद साइकिल चलाई। ग्रुप की संस्थापक डॉ. सुनयना बंसल ने बताया कि राइड के माध्यम से यह संदेश देना चाहते हैं कि साड़ी में भी साइक्लिंग संभव है। उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं अपने काम पर जाते हुए साइक्लिंग को अपनाएं। एक धारणा होती है कि केवल वेस्टर्न ड्रेस में ही साइक्लिंग संभव है। साड़ी या सूट में साइक्लिंग करने में बाधा आएगी लेकिन सभी बाधाओं को तोड़ते हुए और परिवर्तन के लिए प्रेरित करते हुए सभी ने एक साथ पैडल मारते हुए रोमांच का अनुभव किया। साड़ी में साइकिल चलाने का मकसद एक तरफ हमारी विविध संस्कृतियों की सुंदरता को प्रदर्शित करना था, दूसरी ओर स्वतंत्रता, एकता और सशक्तिकरण का संदेश देना था।
साइकिल पर जाएं ऑफिस, शारीरिक और मानसिक तौर पर रहेंगे फिट
बंसल ने कहा कि यदि हम साइक्लिंग करते हुए अपने काम पर जाएं तो शारीरिक तौर पर स्वस्थ होंगे ही मानसिक तौर पर भी मजबूत होंगे। ट्रैफिक की भाग दौड़ में जल्दी-जल्दी कार चलाते हैं जिससे दिमाग पर तनाव रहता है। इन सब समस्याओं से बचने के लिए साइक्लिंग अपनाएं। यदि मन शांत होता है तो हम बेहतर तरीके से अपना कार्य कर पाते हैं। अगर सुबह साइकिल कर जाना है तो शुरू से ही सुबह उठते ही मन में एक पॉजिटिविटी होती है, मन शांत होता है। जाम से बच जाते हैं। पेट्रोल की बचत और प्रदूषण तो यकीनन कम हो जाता है।