लुधियाना के सिविल अस्पताल में पिछले पांच साल से पार्ट टाइम वार्ड अटेडेंट के तौर पर तैनात रजनी कहती हैं कि पढ़-लिख जाऊंगी तो नौकरी रेगुलर होने का मौका मिल सकता है। दसवीं की परीक्षा पास करने पर उसकी काफी सराहना हुई थी और इसी ने उसे आगे भी पढ़ने के लिए उत्साहित किया।
रजनी बताती हैं कि जब दो साल पहले पढ़ाई दोबारा से शुरू की तो ट्यूशन सेंटर में छोटे बच्चों के बीच बैठकर पढ़ना थोड़ा अजीब लगता था लेकिन आज वह अपने फैसले से बेहद खुश है। पढ़ाई से लेकर घर के काम तक में पति पूरा सहयोग दे रहे हैं। मेरी सास सुमित्रा देवी भले ही खुद पढ़ी लिखी नहीं हैं, लेकिन पढ़ाई में मेरा पूरा सहयोग करतीं हैं। अस्पताल में स्टाफ से लेकर एसएमओ तक मुझे पढ़ाई में पूरा सहयोग देते हैं।
मोतियाबिंद का 3 फरवरी को कराया ऑपरेशन
रजनी ने बताया आंखों की रोशनी कम हो गई थी। इस कारण उसे नजदीक पड़ी चीज भी धुंधली दिखाई देती थी। इससे वह पढ़ भी नहीं पा रही थी। उसने 3 फरवरी को एक आंख की सर्जरी कराई और आज ठीक एक महीने बाद वह 12वीं की परीक्षा देने पहुंची।