चंडीगढ़। टैगोर थियेटर में बुधवार को हुए नाटक ‘यूटोपिया’ ने दर्शकों के दिलों को झकझोर दिया। नाटक की शुरुआत होती है एक दंगे के दृश्य से। इसके साथ ही आवाज आती है औरत ने जन्म दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया.. जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा दुत्कार दिया। औरत की समाज को लेकर साहिर लुधियानवी का गीत खत्म होता है तो एक मुसलमान परिवार का सीन सामने आता है। यह परिवार है नज्जो का, जिसमें नज्जो और उसकी अम्मी के साथ उसका भाई आरिफ रहता है। यह कहानी लिखी है वंदना राग ने और नाटक का निर्देशन और इस कहानी को नाटक में रूपांतरित किया है चक्रेश कुमार ने। ड्रामेबाज थियेटर सोसायटी की इस प्रस्तुति में दिखाया गया है कि किस प्रकार से समाज में औरत की स्थिति खराब है। चाहे धर्म कोई भी हो।
दंगों में नज्जो के पिता की मौत हो चुकी होती है और नज्जो के सामने पहली बार उसके पिता की तस्वीर सामने आती है। नज्जो इस तस्वीर को देखकर अपनेी मां से सवाल करती है कि यह कौन हैं। अम्मी का मानना है कि बच्चों को क्या समझाएं कि दंगे क्या होते हैं। दंगे किसी स्कूल की देन तो नहीं होते हैं। इसके बाद एक खुले मैदान में खेलने का दृश्य आता है, जिसमें नज्जो की मुलाकात सच्चिदानंद से होती है। ऐसे में सच्चिदानंद को उसके साथ प्यार हो जाता है। इसके बाद दिखाया जाता है कि सच्चिदानंद को अपने घर की दुकान पर बैठना पड़ता है और वहीं उसकी मुलाकात पार्षद श्री राम मोहन से होती है। श्री राम मोहन एक कट्टरवादी सोच वाले हैं। सच्चिदानंद को कट्टरवादी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेकिन सच्चिदानंद की विडंबना है कि वह किस ओर जाए। सच्चिदानंद कट्टरवादी बन जाता है। अंत में वह अपने बर्थडे के मौके पर दोस्तों द्वारा लाई गई नज्जो से दुष्कर्म करता है। इसी दृश्य के साथ नाटक की कहानी खत्म हो जाती है। लेकिन एक संदेश छोड़ जाती है कि आखिरकार यह अत्याचार कब तक चलेगा। इस नाटक में कई सीन को दर्शाने के लिए शानदार स्टेज बनाया गया है। दंगो को दर्शाने के लिए एक लाल कपड़े का यूज किया है और उससे ही एक विजुअल तैयार किया गया है। इस नाटक की खूबी इसका म्यूजिक है जिसको एकदम लाइव किया गया है।
किरदार-कलाकार
सच्चिदानंद वात्स्यायन गोसाईं-सूर्यकांत
नज्जो-आशना खुराना
नज्जो का भाई आरिफ-निपुण मित्तल
नज्जों की अम्मी-रिशिका भारद्वाज
फकीर का किरदार-विवेक न्योपाने
साधू का किरदार-विनीत शर्मा
नज्जो के अब्बा-हार्दिक ग्रोवर
श्रीराम मोहन पार्षद-रोहन यादव
अग्रवाल-आर्यन शर्मा
दर्जी-आर्या कौशल
म्यूजीशियन-विनीत शर्मा और विवेक न्योपानी