माजरा शहजादपुर की 32 वर्षीय ललिता को घर में गीले कपड़े सुखाते हुए करंट लग गया। महिला जब कपड़े सुखा रही थी तो मुख्य सप्लाई की तार में जोड़ लगा था जोकि टूटकर ललिता के ऊपर गिर गई। इसके बाद पति चमन और लक्की उसे उठाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शहजादपुर लेकर पहुंचे। सुबह सवा 9 बजे अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। जबकि रोस्टर में 4 डॉक्टरों की ड्यूटी थी। परिजनों ने किसी से नंबर लेकर आरएमओ डॉ. वैशाली को फोन कर अस्पताल आने की गुहार लगाई।
डॉ. वैशाली ने जवाब दिया कि मेरे क्लीनिक में उसे लेकर आ जाओ। परिजनों ने सीएचसी के एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद को भी फोन किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। तड़प रही ललिता को बचाने के लिए अस्पताल के गार्ड ने ऑक्सीजन देने का प्रयास किया लेकिन डॉ. की गैर मौजूदगी के चलते वह सही तरह से ऑक्सीजन नहीं लगा पाया।
10 बजकर 05 मिनट पर डॉक्टर यामिनी सीएचसी में पहुंची तब तक महिला दम तोड़ चुकी थी। इसके बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में नारेबाजी करते हुए चारों डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए शव को उठाने से इनकार कर दिया।
इसके बाद सीएचसी पुलिस छावनी में तब्दील हो गई। 7 घंटे शव सीएचसी में ही पड़ा रहा और परिजन डॉक्टरों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। हैरत की बात तो यह है कि सीएचसी के एसएमओ डॉ. तरुण प्रसाद भी सूचना मिलने के 3 घंटे बाद 12 बजकर 40 मिनट पर पहुंचे।
चार डॉ. जिनमें डॉ. वैशाली, डॉ. यामिनी, डॉ. नरेश और डॉ. अनू गैर हाजिर थे। जबकि नाइट में मौजूद डॉ. कीर्ति भी गैर हाजिर पाई गई। हमने इन पांचों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। -डॉ. बलविंद्र कौर, डिप्टी सिविल सर्जन।