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14 महीने से हरियाणा मानवाधिकार आयोग में चेयरमैन और सदस्य क्यों नहीं : हाईकोर्ट

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-खाली पड़े पदों को लेकर हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, हरियाणा सरकार को फटकार
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-अगली सुनवाई तक पद नहीं भरे गए तो संबंधित अधिकारी को रहना होगा हाजिर

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में बीते 14 महीने से मानवाधिकार आयोग में चेयरमैन व सदस्य न होने के चलते कामकाज ठप पड़ने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार को जमकर फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि अगली सुनवाई तक पद नहीं भरे गए तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष उपस्थित होगा और याचिकाकर्ता को मुकदमे की लागत के रूप में 50,000 रुपये अपनी जेब से देने होंगे।
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कैथल निवासी शिवचरण ने याचिका दाखिल करते हुए मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन व सदस्यों के पद भरने की मांग की थी। याचिका पर सरकार ने पहले 30 मार्च तक और बाद में लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद चेयरमैन व सदस्य के पद भरने का कोर्ट को विश्वास दिलाया था। याची के वकील ने कोर्ट को बताया कि एक समय में देश का सबसे बेहतर मानवाधिकार आयोग का माने जाने वाला हरियाणा मानवाधिकार आयोग अब अपने अधिकारों के लिए मोहताज हैं। अब आयोग में न तो चेयरमैन है न ही कोई सदस्य। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है, अब वो अपने अधिकारों के लिए किसके आगे गुहार लगाएंगे। हरियाणा मानवाधिकार आयोग में चेयरमैन का एक और सदस्यों के दो पद हैं। राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एस के मित्तल हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन पद से व सदस्य जस्टिस केसी पुरी अप्रैल 2023 में सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद एकमात्र सदस्य दीप भाटिया के सहारे आयोग सितम्बर 2023 तक चलता रहा। भाटिया के सेवानिवृत होने के बाद आयोग पूरी तरह से चेयरमैन व सदस्य विहीन है। किसी भी मामले में सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसलिए अब मजबूरी में इस विषय को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में इस मामले में दोषी दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी गई है जो कोर्ट के आदेश के बाद भी इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
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