कांग्रेस पार्षद हरफूल चंद कल्याण के नाम से यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी को पत्र भेजने वाले आरोपी का पुलिस अभी तक सुराग नहीं लगा पाई है।
वहीं सेक्टर-11 पुलिस ने तत्कालीन एसएसपी नौनिहाल सिंह के आदेश पर अगस्त माह के पहले सप्ताह में शिकायतकर्ता हरफूल चंद कल्याण की अर्जी पर अज्ञात के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया था।
इस पत्र में कांग्रेस के सीनियर नेताओं का जिक्र करते हुए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया है।
पत्र में लिखा था कि इन सीनियर नेताओं को किसी उच्च पद पर तैनात नहीं किया जाए, क्योंकि उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
सबूत के लिए अखबारों में छपी खबरें भी पत्र के साथ संलग्न की गई थी। इस बात का तब खुलासा हुआ, जब यह पत्र चंद कांग्रेसी नेताओं के घर भी पहुंचा।
पत्र में प्रदीप छाबड़ा, देवेंद्र सिंह बबला, पवन शर्मा, मनिंद्र सिंह, रविंद्र सिंह पाली पर आरोप लगाया गया है और भेजने वाले का नाम हरफूल चंद कल्याण बताया गया था।
वहीं, हरफूल चंद कल्याण का दावा है कि पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया था लेकिन अभी तक आरोपी का पता नहीं लगा पाई है।
उनका कहना है कि पुलिस को उनकी छवि खराब करने वाले का जल्द से जल्द सुराग लगाना चाहिए। डीएसपी सेंट्रल आशीष कपूर का कहना है कि दर्ज मामले की जांच जारी है। जल्द ही मामले का सुराग लग जाएगा।
अगले साल कल्याण हैं मेयर के दावेदार
अगले साल मेयर का पद अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है और कल्याण मेयर पद के लिए दावेदार है। कल्याण के साथ-साथ कांग्रेस में डिप्टी मेयर सतीश कैंथ और पार्षद शीला फूल सिंह भी मेयर पद के दावेदार हैं।
कांग्रेस के ही किसी नेता का तो हाथ नहीं
कांग्रेस के कुछ नेता यह भी मान रहे हैं कि इस फर्जीवाडे़ में अपनी ही पार्टी के किसी नेता का हाथ है।
पत्र लिखने से पहले ही पूर्व मेयर प्रदीप छाबड़ा और रविंद्र सिंह पाली को प्रदेश कार्यकारिणी का प्रवक्ता बनाया गया है।
रेलवे रिश्वत कांड सामने आने के बाद पवन शर्मा काफी सक्रिय हो गए हैं। शहर में जहां-जहां आयोजन हो रहे है, वहां पवन शर्मा अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन सभी के चयन और गतिविधियों से कुछ नेताओं में रोष भी है।