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अवैध विज्ञापन के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार किसे, पांच साल बाद होगा तय

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चंडीगढ़। पांच साल बाद प्रशासन तय करेगा कि अवैध विज्ञापनों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार किस-किस के पास होना चाहिए। निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा और डीसी विनय प्रताप सिंह गृह सचिव नितिन कुमार यादव को इस सप्ताह अपनी रिपोर्ट सौंपकर बताएंगे कि अवैध विज्ञापनों के खिलाफ कौन से अधिकारी कार्रवाई कर सकते हैं। इससे पहले वर्ष 2017 में तत्कालीन वित्त सचिव ने अपनी शक्तियों का हस्तांतरण कर दिया था। इसके बाद शहर में कार्रवाई करने के लिए इंप्लीमेंट अथॉरिटी के रूप में निगम आयुक्त और डीसी को नियुक्त किया गया था।
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वर्ष 2016 में शहर में अवैध रूप से विज्ञापन लगाने के खिलाफ अधिनियम लागू किया गया था। कार्रवाई की पूरी ताकत वित्त सचिव के पास थी। शहर में अतिक्रमण हटाने के लिए निगम और डीसी ऑफिस के पास अपना अतिक्रमण हटाने वाला दस्ता है इसलिए यह ताकत वित्त सचिव ने निगम आयुक्त और डीसी को दे दी। इस संबंध में निगम आयुक्त और डीसी को तय करना था कि फील्ड में किस स्तर तक के अधिकारी अवैध विज्ञापनों को हटा सकते हैं, उन्हें नोटिस दे सकते हैं और उनसे संबंधित समस्याओं को सुन सकते हैं। पांच साल बाद अब तय होगा कि किस स्तर के अधिकारी शहर में अवैध विज्ञापनों पर कार्रवाई करेंगे। संभव है एसडीएम, संयुक्त आयुक्त, एसई और एक्सईएन स्तर के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी सौंपी जाए।
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अभी आयुक्त और डीसी के निर्देश पर होती है कार्रवाई
वर्तमान में निगम आयुक्त और डीसी अपने अधीनस्थ अधिकारियों को शिकायत के आधार पर कार्रवाई के निर्देश देते हैं। लोगों को भेजे जाने वाले नोटिस में भी उनके ही हस्ताक्षार होते हैं। इसमें समस्या यह आती है कि फील्ड में अवैध विज्ञापन लगा होने के बावजूद कोई अधिकारी और कर्मचारी कार्रवाई नहीं करता है क्योंकि उसके अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई का मुद्दा आता ही नहीं।
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पीयू के चुनाव के बाद अदालत में चला गया मामला
वर्ष 2017 में पंजाब विश्वविद्यालय के चुनाव थे। इस दौरान शहर में कई जगह बिना अनुमति के ही उम्मीदवारों के पक्ष में मत डालने संबंधी पर्चे लगा दिए गए। तब नोटिस जारी कर भारी भरकम जुर्माना भरने को कहा गया था। इसके बाद कुछ लोग हाईकोर्ट चले गए। कहा गया कि जब इसके लिए अपीलिंग अथॉरिटी, कौन कार्रवाई करेगा और कितना जुर्माना लगेगा, यही तय नहीं है तो किस आधार पर नोटिस जारी किए गए हैं। इसके बाद प्रशासन पर दबाव बना और तत्काल जिम्मेदार नियुक्त करने को कहा है।
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व्यापारियों के लिए बढ़ेंगी मुश्किलें
वर्तमान में निगम की ओर से बढ़ी सख्ती के बाद व्यापारी लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसे में जब क्षेत्रीय स्तर पर कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा तो सख्ती और बढ़ जाएगी। निगम ने हाल ही में मार्केट में लगे 40 अवैध होर्डिंग को हटाकर 1.8 करोड़ रुपये का नोटिस भेजा था। इससे पहले राजनीतिक रैलियों और धार्मिक आयोजनों पर भी नेताओं व स्वागतकर्ताओं के खिलाफ निगम ने नोटिस भेजकर जुर्माना वसूला है।
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