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जहां पेड़ों को जिंदा रखने के लिए बनाई जाती है पॉलिसी, उसी के बाहर मर रहे हैं पेड़

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चंडीगढ़। सेक्टर-9 स्थित यूटी सचिवालय.. जहां पर शहर की सुंदरता और पेड़ों को बचाने के लिए पॉलिसी बनाए जाते हैं, वहीं पर दर्जनों पेड़ दम तोड़ रहे हैं। लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की उन पर नजर नहीं पड़ रही है। अफसरों का ध्यान इन पेड़ों की दुर्दशा पर लाने के लिए समस्या समाधान टीम ने इस पेड़ों पर शुक्रवार को कुछ पोस्टर चिपका दिए। इन पर लिखा था...मैं मर रहा हूं, मुझे बचाओ।
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कंक्रीट से जकड़े कुछ पेड़ यूटी सचिवालय के मुख्य गेट पर हैं, जबकि कुछ पेड़ पंजाब पुलिस हेडक्वाटर के सामने हैं। टीम के सदस्यों ने यूटी प्रशासन से मौजूदा पेड़ों को बचाने के लिए आग्रह किया और इस बारे एक पत्र भी लिखा है। इस मौके पर समस्या समाधान टीम के ओंकार सैनी का कहना है कि यूटी सचिवालय, जहां से पूरे चंडीगढ़ के लिए कानूनी हुक्म जारी होते हैं, ठीक उसके सामने पेड़ों की जड़ों को कंक्रीट से दबा कर नियमों कि धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे चंडीगढ़ में पेड़ों के रखरखाव की क्या स्थिति होगी।
मालविंदर पाल सिंह लाडी और शिशुपाल का कहना है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और चंडीगढ़ प्रशासन का आदेश है कि पेड़ों के चारों तरफ कम से कम एक मीटर की कच्ची जमीन छोड़नी है, ताकि पेड़ों की जड़ों तक पानी जा सके और वो मरें नहीं।
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तीन दर्जन पेड़ ऐसे, जिनकी जड़ों को कंक्रीट ने जकड़ा
टीम के सदस्यों ने कहा कि यूटी सचिवालय, चंडीगढ़ पुलिस हेडक्वार्टर, पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर, मिनी सचिवालय पंजाब और केंद्रीय सदन की पिछली पार्किंग में कुल मिलाकर करीब तीन दर्जन पेड़ ऐसे हैं, जिनकी जड़ों को कंक्रीट ने ढका हुआ है। टीम के मनोज शुक्ला का कहना है कि इसके अलावा हाल ही में सेक्टर-27, 28, 29 और 30 की तरफ केबल डालते हुए जेसीबी मशीन से खुदाई करवाई थी, जिसके कारण बहुत से हरे-भरे अर्जुन के पेड़ों की जड़े टूट गई हैं। समाचार पत्रों में खबर छपने के बाद ठेकेदार ने गड्डे में मिट्टी तो वापस भरवा दी, मगर अभी भी बहुत से पेड़ों की हालत ऐसी है कि वो हल्के हवा के झोखे से भी टूट सकते है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों से भारी जुर्माने के साथ, सजा का प्रावधान भी रखा जाए ताकि आगे से कोई भी पेड़ों और पर्यावरण का नुकसान न पहुंच सके।
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