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टालमटोल रवैया: चंडीगढ़ के पास अपनी स्टार्टअप नीति नहीं, नौ साल से कागजों में ही अटकी

Tue, 25 Feb 2025 02:17 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

वर्ष 2023 में चंडीगढ़ में 126 स्टार्टअप रजिस्टर हुए थे, जो 2024 में 102 ही रह गए। जबकि, 2019 से प्रशासन के समर्थन के बिना स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में स्टार्ट अप इंडिया की शुरुआत की थी। प्रशासन ने 2018 से काम शुरू किया। 
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स्टार्टअप - फोटो : i stock
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विस्तार
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केंद्र सरकार के स्टार्टअप इंडिया मूवमेंट को 9 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन चंडीगढ़ अब तक अपनी खुद की स्टार्टअप नीति नहीं बना पाया है। प्रशासन की लेटलतीफी और अधिकारियों के टालमटोल रवैये के चलते यह नीति फाइलों में ही अटकी हुई है। 
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लगातार बदलते प्रशासनिक फैसलों के कारण स्टार्टअप इकोसिस्टम को जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया, जिसका असर अब दिखने भी लगा है और शहर में स्टार्टअप की संख्या घटने लगी है।

वर्ष 2023 में चंडीगढ़ में 126 स्टार्टअप रजिस्टर हुए थे, जो 2024 में 102 ही रह गए। जबकि, 2019 से प्रशासन के समर्थन के बिना स्टार्टअप की संख्या बढ़ रही थी। केंद्र सरकार ने वर्ष 2016 में स्टार्ट अप इंडिया की शुरुआत की थी। प्रशासन ने 2018 से काम शुरू किया। 
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करीब एक से डेढ़ साल बाद फैसला हुआ कि यूटी केंद्र की ही नीति को अपनाएगा। इसमें करीब एक साल गुजर गए। फिर तय हुआ कि चंडीगढ़ की स्थिति के अनुसार अपनी नीति ही ठीक रहेगी तो वर्ष 2021 में फिर काम शुरू हुआ था लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई। अधिकारी बदले तो जनवरी 2022 में उद्योग विभाग को जिम्मेदारी सौंपी। सितंबर 2022 नीति का ड्राफ्ट तैयार किया गया। लोगों से सुझाव मांगे। अब ढाई साल बीत चुके हैं लेकिन आज तक नीति फाइलों में ही है। 

चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज के वाइस-प्रेसिडेंट नवीन मंगलानी ने कहा कि चंडीगढ़ जैसे शहर में स्टार्टअप नीति का न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। युवा पीढ़ी पुश्तैनी बिजनेस को छोड़ स्टार्टअप पर जोर दे रहे हैं लेकिन प्रशासन उनका साथ नहीं दे रहा है।
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30 अगस्त 2022 को जारी हुआ था ड्राफ्ट, आज तक लागू नहीं

यूटी प्रशासन ने 30 अगस्त 2022 को स्टार्टअप नीति का ड्राफ्ट जारी किया था। पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने कहा था कि एक मजबूत इकोसिस्टम बनाया जाएगा। एक समर्पित स्टार्टअप हब, 50 करोड़ के फंड के साथ युवाओं को कई लाभ मिलेंगे। पंजीकृत स्टार्टअप को कॉलेटरल फ्री लोन, विद्यार्थियों को इंसेंटिव, उद्यमियों के लिए को-वर्किंग स्पेस, फंडिंग स्ट्रेटजी, बिजनेस मॉडल डेवलपमेंट, कंपनी रजिस्ट्रेशन में मदद, लीगल और डिजिटल मार्केटिंग में मेंटरशिप का प्रावधान रखा लेकिन शहर के युवा आजतक उन लाभों के इंतजार में हैं।

डीपीआईआईटी के वर्तमान आंकड़ों के अनुसार 

कुल मान्यता प्राप्त स्टार्टअप - 423
हेल्थकेयर और लाइफ साइंस - 65
आईटी सर्विस - 39
एजुकेशन - 31
एग्रीकल्चर - 16
फाइनेंस टेक - 15
फूड - 15
मार्केटिंग - 9
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस - 8
ऑटोमोटिव - 8
अन्य सभी - 217
(पिछले वर्षों में 19 स्टार्टअप मान्यता प्राप्त होने के बाद बंद हुए)

मान्यता प्राप्त स्टार्टअप से पैदा हुई नौकरियां

वर्ष             स्टार्टअप          नौकरियां
2024             102             -
2023             126           1,328
2022             81             898
2021             69             978
2020             55             355
2019             37             312
(राज्यसभा में केंद्र सरकार द्वारा दिए आंकड़े)

स्टार्टअप पॉलिसी तैयार है। इसे मंजूरी के लिए सरकार को भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही लागू कर दी जाएगी। - निशांत कुमार यादव, सचिव, उद्योग विभाग
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