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...जब नौजवान माल लेकर हो जाता है रफूचक्कर

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चंडीगढ़। बाल भवन में आयोजित टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के छठे दिन सोमवार को ‘नौटंकी आला अफसर’ का मंचन किया गया। इस नाटक को मूल रूप से मुद्रा राक्षस द्वारा लिखा गया जबकि इसके निदेशक आतमजीत सिंह थे। इस नाटक का मंचन विनोद रस्तोगी स्मृति संस्थान प्रयागराज ने किया। नाटक भ्रष्टाचार पर केंद्रित रहा। नाटक का केंद्र रहा एक ऐसा व्यक्ति जिसको कस्बे के लोग आला अफसर समझ लेते हैं और वह सभी का माल लेकर चंपत हो जाता है।
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इसमें दिखाया गया कि चितपुर कस्बे में चेयरमैन, हाकिम, पोस्टमास्टर, हेडमास्टर, दरोगा भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। ऐसे में खबर आती है कि इनके खिलाफ ख़ुफिया जांच के लिए एक आला अफसर भेजा गया है। इसमें दिखाया जाता है कि इसी कस्बे में होटल में फोकटिया नौजवान ठहरा है जिसे यह भ्रष्टाचारी, आला अफसर समझ बैठते हैं और उसकी खूब आवभगत करते हैं। नौजवान भी उनकी गलतफहमी का फायदा उठाकर उनसे खूब धन वसूलता है। चेयरमैन उसे अपने घर ले जाता है, जहां वह उसकी बीवी और बेटी दोनों से इश्क लड़ाता है और गांव के गरीब लोगों से भी रिश्वत लेता है। यहां तक की अत्याचार से पीड़ित धोबन को नहीं बख्शता और अच्छा खासा माल इकट्ठा करके चंपत हो जाता है। लोगों की हैरानी का उस समय ठिकाना नहीं रहता है जब उनको पता चलता है कि आला अफसर तो कल आने वाले हैं। इस नाटक में शुभम वर्मा, गौरव त्रिपाठी, अजय मुख़र्जी, अभिलाष नारायण, अक्षत अग्रवाल, सुधांशु गिरी, अंकित कश्यप, रजत कुशवाहा, शुभ्रा मण्डल, सोम मंडल, सौरभ शुक्ला, ऋषि श्रीवास्तव, मनीष पांडे, आशीष यादव, रोहित यादव, अमन पाण्डेय और शुभेंदु कुमार शामिल थे। इस नाटक में हारमोनियम पर मो. हारुन, नक्कारा पर मास्टर फूलचंद, ढोलक पर सादिक अली रहे।
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