चंडीगढ़। टैगोर थिएटर में बुधवार को नाटक काल रूपम का मंचन हुआ। इस नाटक को कुलदीप कुणाल ने लिखा है। कशिश देवगन के निर्देशन में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ आर्ट एंड कल्चरल विभाग के कलाकाराें ने अभिनय किया। नाटक कल रूपम 1985 में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में घटित वास्तविक घटनाओं पर आधारित गहरी और रहस्यमय कहानी है।
कहानी की नायिका सुमित्रा सिंह एक सामान्य महिला है जिसे डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया जाता है। कुछ समय बाद सुमित्रा के शरीर में एक अजनबी आत्मा प्रवेश कर लेता है। यह आत्मा शिवा त्रिपाठी की है जो पहले उसी जिले में रहती थी। वह एक दर्दनाक घटना में जान गवां बैठी थी। सुमित्रा अनपढ़ है जबकि शिवा त्रिपाठी अर्थशास्त्र से एमए है। वह अंग्रेजी भी बोलती है।
नाटक में दिखाया गया कि शिव के दो बच्चे रिंकू और टिंकू हैं। शिवा अपने पिता को पत्र लिखती है। पिता मजाक समझते हैं। बाद में शिवा के पिता आते हैं। उससे पूछते हैं। फिर घर लेकर आते हैं। गांव के कई लोग हैं महिलाएं भी है उसके पिता कहते हैं कि इसमें पहचानो- तुम्हारी मां कौन है। इस पर वह कहती है मेरी मां इनमें कोई नहीं है। घर के अंदर जाकर अपनी मां को ढूंढ लेती है। पेटी में से अपनी सगाई की साड़ी मां को दिखाती है। तब मां को भी भरोसा होता है कि उनकी ही बेटी है, लेकिन बच्चे नहीं पहचान पाते। शिव बताती है कि उसे दहेज के लिए सास ननद और पति ने हत्या कर दी थी और लाश पटरी पर रख दी थी। उसके सास ननद को पुलिस पकड़ कर लाती है। थाना आत्मा की गवाही नहीं लेता वे छूट जाते हैं। बाद में पुराने घर चली जाती है। वह जगदीश के बच्चे को पालन पोषण करती है। और 14 वर्ष तक जीवित रहती है। नाटक में 25 कलाकारों ने अभिनय किया।