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Chandigarh News: ...जब गुरुजी ने किताबों से आगे की दुनिया दिखाई

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चंडीगढ़। शिक्षक सिर्फ ब्लैकबोर्ड पर पाठ पढ़ाने वाला नहीं होता, वह बच्चों के सपनों को दिशा देने वाला भी हो सकता है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में कुछ शिक्षकों ने इसे अपने काम से साबित किया है। किसी ने कबाड़ से डोम थिएटर और साइंस पार्क तैयार कर बच्चों को विज्ञान समझने का नया तरीका दिया तो किसी ने अपनी जेब से 50 हजार रुपये खर्च कर एरोस्पेस पार्क बनवा दिया। वहीं, एक शिक्षक दंपती झुग्गियों में रहने वाले उन बच्चों तक पढ़ाई लेकर पहुंच रहा है, जिनके लिए स्कूल अब तक दूर था।
कबाड़ से डोम थिएटर, खेल-खेल में विज्ञान
मलोया कॉलोनी के सरकारी स्कूल के शिक्षक रवि जैसवाल ने बेकार सामान का इस्तेमाल कर बच्चों के लिए डोम थिएटर तैयार किया। इसके बाद स्कूल में साइंस पार्क और चाइल्ड सेंटरिक लैब भी बनाई। साइंस पार्क में बच्चे खेल-खेल में विज्ञान के सिद्धांत समझते हैं। यहां सी-सॉ के जरिए हैंडपंप के काम करने का तरीका समझाया जाता है। लैब में गैजेट और विज्ञान की किट्स लगाई गई हैं। रवि जैसवाल की पहल का असर बच्चों की उपलब्धियों में भी दिखा। उनकी मेहनत से 2020 में एक छात्रा को जापान में साइंस प्रतियोगिता और 2019 में एक विद्यार्थी को इसरो में रॉकेट लॉन्च देखने का मौका मिला। उनकी इसी पहल के लिए उन्हें 5 सितंबर को नेशनल अवार्ड मिलेगा।
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जेब से 50 हजार खर्च, तैयार कराया एरोस्पेस पार्क
सेक्टर-33 स्थित सरकारी स्कूल की शिक्षिका अमिता ने बच्चों को विज्ञान से जोड़ने के लिए अपनी जेब से करीब 50 हजार रुपये खर्च किए। इस राशि से स्कूल में एरोस्पेस पार्क तैयार कराया गया। उनका मानना है कि बच्चों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोगों और नई गतिविधियों के जरिये सीखने का अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि समाज के लोग भी अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दें तो बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।
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झुग्गियों में पहुंचे गुरुजी, 240 बच्चों को पढ़ाई से जोड़ा
रायपुर खुर्द के सरकारी स्कूल के शिक्षक कृष्ण राठी पत्नी के सहयोग से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने का अभियान चला रहे हैं। अब तक करीब 240 बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने का दावा है। उनका प्रयास है कि भीख मांगने वाले और स्कूल से दूर रहने वाले बच्चे पढ़ाई से जुड़ें और आगे बढ़ने का अवसर पाएं। इस मुहिम में उनकी पत्नी भी सक्रिय रूप से साथ दे रही हैं।
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