31 दिसंबर की रात को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि हर प्रेग्नेंट महिलाओं को छह हजार रुपये मिलेंगे। घोषणा को दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस योजना के बारे में न तो लोगों को कोई जानकारी दी गई है और न ही अधिकारियों के पास कोई पुख्ता जानकारी है।
प्रेग्नेंट महिलाएं और जिनके हाल ही में बच्चे पैदा हुए है, वे पूछ रही हैं कि जो छह हजार रुपये देने की घोषणा हुई है, वो कब तक मिलेंगे। कुछ तो तंज कस रहे हैं कि नोटबंदी को घोषणा के एक ही दिन बाद ही लागू कर दिया गया, लेकिन इस योजना पर कोई बात नहीं कर रहा है।
घोषणा के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि छह हजार रुपये हेल्थ डिपार्टमेंट देगा। इस बारे में जब हेल्थ डिपार्टमेंट से पूछा गया तो जवाब मिला कि यह राशि सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से दी जाएगी।
सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से जवाब मिला कि इस योजना पर काम चल रहा है जैसे ही दिशा-निर्देश आएगा, उसे तुरंत ही लागू कर दिया जाएगा।
रुपये मिलते तो राहत मिलती
इंदिरा कालोनी के रहने वाले शेर मोहम्मद पेशे से पेंटर हैं। उनकी पत्नी ने चार दिन पहले सेक्टर 16 के हास्पिटल में एक बच्चे को जन्म दिया है। नोटबंदी के बाद से उसका काम पहले से ही मंदा था।
एक स्कीम है, लेकिन लोगों को पता नहीं
Demonetisation:
शेर मोहम्मद ने बताया कि उसकी पत्नी ने आपरेशन के बाद बच्चे को जन्म दिया है। इसमें करीब सात हजार रुपये का खर्च आया है। यदि छह हजार रुपये मिलते तो काफी राहत मिलती।
इस बारे में कोई जानकारी भी नहीं दे रहा है। बुड़ैल के रहने वाले अजय पांडेय ने बताया कि उनकी पत्नी ने 23 दिसंबर को बच्चे को जन्म दिया है। बच्चे का वजन काफी कम था।
तब से उनकी पत्नी व बच्चा हास्पिटल में ही हैं। अब तक काफी रुपये खर्च हो गए है। प्रधानमंत्री की योजना के बारे में कुछ भी नहीं पता। न ही कोई जानकारी दी गई।
एक स्कीम है, लेकिन लोगों को पता नहीं
सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की ओर से शहर में एक स्कीम लागू है। इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के तहत प्रेग्नेंट महिलाओं को छह हजार रुपये की राशि दी जाती है।
तीन हजार रुपये डिलीवरी के समय दिए जाते हैं और तीन हजार रुपये डिलीवरी के बाद जब शिशु छह महीने का हो जाता है। इसमें सरकारी नौकरीपेशा वालों को रुपये नहीं मिलते, जबकि बाकी लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
इसमें चौथे महीने में प्रेग्नेंट महिला को आंगनवाड़ी में नाम रजिस्टर्ड करवाना पड़ता है। सातवें महीने में एंटी नेटल चेकअप के बाद उसका फार्म भर दिया जाता है।
करीब नौ करोड़ रुपये देने होंगे
डाक्टर
- फोटो : file photo
फार्म के साथ आधार कार्ड और बैंक अकाउंट की कापी लगती है। इस योजना में दो बच्चों तक महिला को राशि दी जाती है। साल 2011-12 में योजना शुरू हुई थी। अब तक पांच हजार से ज्यादा महिलाओं को इसका लाभ दिया जा चुका है, जबकि छह हजार वेटिंग में है। उन्हें लाभ दिया जाना है।
करीब नौ करोड़ रुपये देने होंगे
चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में हर साल 25 हजार डिलीवरी होती है। इसमें 15 हजार चंडीगढ़ के निवासी होते हैं, जबकि दस हजार आसपास के जिलों के होते हैं। इस हिसाब से सिर्फ चंडीगढ़ में प्रेग्नेंट महिलाओं को लाभ देने के लिए करीब नौ करोड़ रुपये की राशि देनी होगी।
हालांकि इसमें कई डिलीवरी प्राइवेट हास्पिटल में होती है, उन्हें इसका लाभ नहीं दिया जाएगा। इस योजना के तहत रुपये हेल्थ डिपार्टमेंट की ओर से नहीं दिए जाएंगे, सोशल डिपार्टमेंट की ओर से रुपये दिए जाने हैं। -डा. राकेश कश्यप, डीएचएस चंडीगढ़
अभी इस स्कीम के बारे ज्यादा जानकारी नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से जो भी स्कीम आती हैं, उन्हें तुरंत लागू किया जाता है। इस स्कीम के बारे में डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज से पता कर लें।अनुराग अग्रवाल, होम सेक्रेटरी चंडीगढ़ प्रशासन
इस योजना पर काम किया जा रहा है। जैसे ही दिशा-निर्देश आएंगे, उन्हें लागू कर दिए जाएंगे। वैसे चंडीगढ़ में एक योजना के तहत प्रेग्नेंट महिलाओं को छह हजार रुपये की राशि का लाभ दिया जा रहा है।निशु सिंगल, डायरेक्टर सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट चंडीगढ़