भाकियू ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एक तो मौसम बदल रहा है, दूसरा सरकार किसानों का सिस्टम बिगाड़ने पर लगी है। 13 अप्रैल को भी प्रदेश सरकार की ओर से 18 मंडियों में 24 घंटे के लिए खरीद प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इनमें यमुनानगर, करनाल, अंबाला, कैथल, सोनीपत और पानीपत जिले की बड़ी मंडियों को बंद कर दिया था।
उठान प्रक्रिया सुस्त होने से हरियाणा की अनाज मंडियां गेहूं से पट गईं हैं। तय समय में गेहूं का उठान नहीं होने के कारण प्रदेश सरकार ने मंडियों में खरीद बंद करने का निर्णय लिया है। इस बार शनिवार व रविवार दो दिन तक मंडियों में खरीद कार्य नहीं होगा, बल्कि केवल उठान कार्य किया जाएगा। इस संबंध में सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे दो दिनों तक फसल मंडियों में न लेकर आएं।
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खरीद कार्य 19 अप्रैल से शुरू होगा। उधर, भाकियू ने कड़ा विरोध करते हुए कहा कि एक तो मौसम बदल रहा है, दूसरा सरकार किसानों का सिस्टम बिगाड़ने पर लगी है। 13 अप्रैल को भी प्रदेश सरकार की ओर से 18 मंडियों में 24 घंटे के लिए खरीद प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। इनमें यमुनानगर, करनाल, अंबाला, कैथल, सोनीपत और पानीपत जिले की बड़ी मंडियों को बंद कर दिया था।
बारदाने की कमी बन रही बाधा
हरियाणा में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई थी। सरकार ने दावा किया था कि गेहूं का उठान 24 घंटे में सुनिश्चित किया जाएगा, हालांकि अभी तक ऐसा संभव नहीं हो पाया है। उठान नहीं होने से सभी मंडियां अनाज से भर गईं हैं। इसमें सबसे बड़ी बाधा बारदाने की कमी आ रही है। आढ़ती और खरीद एजेंसी बारदाने के लिए भाग दौड़ कर रहे हैं।
सरकार किसानों की फसल खरीद सही तरीके से नहीं कर पा रही है। पहले 18 मंडियां 24 घंटे के लिए बंद की और अब सभी मंडियां। एक तो मौसम खराब हो रहा है और बारिश की आशंका है। ऐसे में किसान कटी फसल को कहां लेकर जाएगा। सरकार को तुरंत यह फैसला वापस लेना चाहिए और खरीद चालू करनी चाहिए। - रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।
तो लाइसेंस होगा सस्पेंड
बदलते मौसम और बारिश से किसानों की फसलों को बचाने की जिम्मेदारी आढ़तियों की होगी। इसके लिए उनको तिरपाल समेत पॉलिथीन की व्यवस्था करनी होगी। अगर कोई ऐसा नहीं करता है तो उस आढ़ती का लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्य प्रशासक ने शुक्रवार को ये आदेश जारी किए हैं। सभी जोनल प्रशासक, जेडएमईओ और डीएमईओ को भेजे पत्र में साफ कहा गया है कि इन आदेश का पालन करने को लेकर सचिव निजी तौर पर जिम्मेदार होंगे।