पीएचडी को लेकर यूजीसी नई गाइडलाइन जारी कर रहा है। रिसर्च के जरिये समाज को लाभ मिलना जरूरी है। यह हर रिसर्च में होना चाहिए तभी पीएचडी का रजिस्ट्रेशन होगा। थीसिस की एक कॉपी यूजीसी के पास भी भेजनी होगी। उसकी जांच एक कमेटी करेगी। वह देखेगी कि समाज को उनके रिसर्च से क्या लाभ मिलेगा।
सरकार रिसर्च को बढ़ावा दे रही है। हर विश्वविद्यालय भी रिसर्च के जरिये अपनी रैंक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन रिसर्च के लिए तमाम ऐसे विषयों का चयन हो जाता है, जिससे समाज को कुछ नहीं हासिल हो पाता है। सूत्रों का कहना है कि यूजीसी ने इसे गंभीरता से लेते हुए निर्णय लिया है कि वही पीएचडी मान्य होगी, जिसमें समाज को कुछ न कुछ मिले। यानी रिसर्च के जरिए समाज का विकास होना चाहिए। समाज के विकास से ही देश प्रगति करेगा।
सूत्रों का कहना है कि यूजीसी ने यह नियम इसी साल से लागू कर दिया है। हर रिसर्च स्कॉलर को रिसर्च के लिए विषय ऐसा लेना होगा कि उसकी डिग्री मान्य हो जाए। डिग्री भी तभी मिलेगी, जब यूजीसी थीसिस को हरी झंडी दे देगी। मालूम हो कि पीयू में हर साल 400 से अधिक विद्यार्थी रिसर्च करते हैं। इस बात का यहां भी ध्यान रखा जाएगा ताकि किसी रिसर्च स्कॉलर को नुकसान न हो।