पिछले बजट में आयुष्मान भारत की स्कीम को लांच किया गया था, जो मील का पत्थर साबित हो रही है। लेकिन इसमें अब भी खामियां हैं। इसमें किसी भी ट्रांसप्लांट को शामिल नहीं किया गया है और कई ऐसे लोग हैं, जो लाभार्थियों की सूची में ही नहीं है, जबकि वे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं।
लोग चाहते हैं कि एक तो पांच लाख तक के सभी ट्रांसप्लांट आयुष्मान के दायरे में लाए जाएं और गरीब व मध्यवर्गीय लोगों को भी इस स्कीम के दायरे में लाया जाए। इस क्षेत्र में दूसरी बड़ी मांग स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी कम करने की है। आज स्वास्थ्य बीमा हर दूसरे व्यक्ति की जरूरत बन चुका है। इस पर करीब 18 फीसदी जीएसटी की दर लग रही है। इसे कम से कम होना चाहिए, ताकि लोगों को सस्ता इलाज मिल सके।
टैक्स छूट सीमा ढाई लाख रुपये तक बढ़ाई जाए
2.5 लाख रुपये तक टैक्स छूट सीमा की बढ़ाने की मांग की जा रही है। पिछले बजट में ढाई लाख रुपये प्रति वर्ष से 5 लाख रुपये प्रति वर्ष की आय सीमा में आने वाले लोगों के लिए तत्कालीन दस फीसदी इनकम टैक्स रेट को घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया था। जबकि 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये की आय सीमा में आने वाले लोगों का इनकम टैक्स रेट 20 प्रतिशत ही रख दिया गया।
जिससे 5 प्रतिशत के बाद 20 प्रतिशत का यह टैक्स रेट काफी अधिक लगता है। इसलिए लोग इस मामले में कुछ रियायत की उम्मीद कर रहे हैं। म्यूच्यूअल फंड से 1 लाख रुपये से अतिरिक्त मुनाफे पर दस फीसदी टैक्स लगाया गया था। पिछले दो से तीन सालों में म्यूचुअल फंड के बारे में काफी प्रचार किया गया है। छोटे निवेशकों की तादाद बढ़ी है। ऐसे में इसमें टैक्स कम करना चाहिए, ताकि निवेशकों की संख्या में बढ़ोतरी हो।
किसानों को मिले मंथली इनकम
बजट से पहले यूनिवर्सल बेसिक इनकम की बात हो रही है। यानी लोगों को हर महीने कुछ पैसे का इंतजाम। लेकिन लोग मानते हैं कि इससे पहले किसानों के बारे में सोचना होगा। उनकी हर महीने की सैलरी तय करनी चाहिए। खासकर उन लोगों की, जिनके पास खुद की कोई जमीन नहीं है और वह किसी दूसरे के खेती में काम करते हैं। इसके अतिरिक्त स्वामीनाथन कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया जाए और सभी फसलों में न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की गई है।
इस बार के बजट में किसानों के विकास के लिए कुछ बेहतर करने की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों का विकास भी इससे जुड़ा है। साथ ही आठ लाख तक की आय वाले इकनॉमिक वीकर लोगों को जो दस फीसदी आरक्षण देने की बात हुई है, जबकि उसमें तमाम लोग इनकम टैक्स चुका रहे हैं, ऐसे में इस बजट में इस गैप पर निर्णय लिए जाने की संभावना है। -प्रो. उपिंदर साहनी, चेयरमैन, इकनॉमिक्स डिपार्टमेंट पीयू
बजट अच्छा आएगा क्योंकि चुनाव आने वाले हैं। यह अंतरिम बजट है, इसलिए इस बजट से कोई बड़ी उम्मीद नहीं कर सकते, लेकिन हो सकता है कि टैक्स में छूट की सीमा बढ़ा दी जाए। चंडीगढ़ को इस बजट से खास उम्मीद नहीं है। रेलवे बजट भी साथ होगा। वहीं महिलाओं को आकर्षित करने के लिए सरकार स्त्री धन को लीगल कर सकती है। अजय जग्गा, वकील व जीएसटी एक्सपर्ट
किसान हमारे अन्नदाता हैं। स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने की बात कई सालों से हो रही है। अब इससे ऊपर उठने की बात होनी चाहिए। हर फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाना जरूरी है। मैं अभी मध्यप्रदेश का दौरा करके आया हूं। वहां किसानों से बात करने से पता चला कि कई किसानों की साल भर की इनकम 50 हजार से भी कम है। यह काफी चिंताजनक बात है। बजट में इस बारे में जरूर सोचना होगा। राहुल महाजन, विशेषज्ञ आर्गेनिक फार्मिंग