चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी ने हॉस्टलों में रह रहे विद्यार्थियों को राहत दी है। इन विद्यार्थियों पास सामान खरीदने के लिए पैसे खत्म हो गए थे। पीयू ने प्रत्येक स्टूडेंट को 500 रुपये देने का निर्णय लिया है। यदि कोई विद्यार्थी सामान लेकर आ भी गए और अगर वह बिल लगाएंगे तो पीयू उन्हें 500 रुपये तक दे देगा। लेकिन सामान्य स्थिति होने पर पीयू इन पैसों को वापस ले लेगा।
कोरोना के चलते 22 मार्च को पहला लॉकडाउन था जो जनता कर्फ्यू के नाम से जाना गया। यह कर्फ्यू लगा तो पीयू के तमाम विद्यार्थी अपने घर चले गए। उसके बाद बाकी विद्यार्थी 24 मार्च तक चले गए। दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी नहीं जा पाए। इनकी संख्या 200 से अधिक है। यह अपने-अपने हॉस्टलों में रह रहे हैं। मेस में इनके खाने की व्यवस्था की गई है।
विद्यार्थियों ने पीयू प्रशासन तक पहुंचाई अपनी बात तो लिया निर्णय
लॉकडाउन को लगभग दो सप्ताह हो गए। इसी बीच स्टूडेंट्स के पास पैसे की कमी महसूस होने लगी। उनके पास साबुन, तेल, टूथपेस्ट व अन्य जरूरी सामान खत्म हो गया। इस मामले को कुछ विद्यार्थियों ने पीयू प्रशासन तक पहुंचाया। इसको पीयू ने गंभीरता से लिया और आपात बैठक आयोजित की गई। प्रत्येक विद्यार्थी को 500 रुपये देने का निर्णय लिया गया।
पीयू प्रशासन यह भी सोच रहा है कि पीयू की एक दुकान को तय कर दें कि स्टूडेंट्स जो जरूरी सामान खत्म हो जाए वह यहां से ले ले। साथ ही उसका बिल पीयू प्रशासन को मुहैया कराए। उसका भुगतान कर दिया जाएगा या पीयू विद्यार्थियों को भी रकम देने का मन बना रहा है। बैठक में जो निर्णय हुआ उसका प्रस्ताव तैयार कर वीसी प्रो. राजकुमार के पास भेज दिया गया। वह जल्द ही इसे फाइनल मंजूरी देंगे। विद्यार्थियों को इस बात का पता लगा तो उन्होंने राहत की सांस ली है।
मदद कर रहे हैं तो फिर वापसी क्यों?
देशभर में कोरोना लगातार पैर पसार रहा है। इस दौरान लोगों की मदद के लिए लोग आगे आ रहे हैं। कोई राशन बांट रहा है तो कोई अन्य मदद दे रहा है। पीएम फंड में भी पैसे लोग भेज रहे हैं। यह सब मदद के नाम पर हो रहा है। यह मदद वापस नहीं होगी। कुछ स्टूडेंट्स का कहना है कि वह भी लॉकडाउन में यहां फंसे हैं अन्यथा अपने घर होते। ऐसे स्थिति में पीयू उन्हें मदद दे रहा है तो फिर रकम वापसी की मांग क्यों की जा रही है।
चाहे सामान्य स्थिति आने पर हो या फिर कोई और स्थिति बने। हालांकि विद्यार्थियों का कहना है कि पीयू अगर यह रकम नहीं लेगा तो उन्हें लाभ अधिक होगा, क्योंकि कोरोना के खत्म होने के बाद भी परिवारों के पास तुरंत पैसे नहीं होंगे।