भारत-पाक के बीच मौजूदा हालात के मद्देनजर सेना के साथ-साथ वायुसेना भी पूरी तरह से सतर्क है। वायुसेना अपनी उच्चस्तरीय ऑपरेशनल तैयारियों को पूरा करने में जुटी है। इसके साथ-साथ एयरबेसों और लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को कैसे सुरक्षित रखना है, इस पर भी एयरफोर्स अफसर पूरी तरह गंभीर हैं।
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने वेस्टर्न एयर कमांड के सभी एयरबेसों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमांड को हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
वेस्टर्न एयर कमांड के तहत आने वाले सभी एयरफोर्स स्टेशनों के एओसी और स्टेशन कमांडों को वायुसेना प्रमुख ने अपनी उच्चस्तरीय ऑपरेशनल तैयारियों को भी पूरा रखने को कहा है। इन अफसरों के साथ वायुसेना प्रमुख ने दो दिन मैराथन बैठक की। इसमें मौजूदा हालात में एयरफोर्स को किस तरह सतर्क रहना है और अपने अभियानों को कैसे धार देनी है, इस पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर मार्शल रघुनाथ नांबियार भी मौजूद रहे।
कमांड की होगी अहम भूमिका: भविष्य में जो भी हालात बनते हैं और उनमें एयरफोर्स जो भी ऑपरेशनंस करती है। उसमें वेस्टर्न एयर कमांड की भूमिका सबसे अहम रहेगी। इस दौरान ऑपरेशनल तैयारियों को उच्चस्तरीय बनाने, बुनियादी ढांचों के विकास और रखरखाव पर भी चर्चा की गई।
...इसलिए पाक के निशाने पर है कमांड
वेस्टर्न एयर कमांड इंडियन एयरफोर्स की सबसे अहम कमांड है। यहां से एयरफोर्स पाकिस्तान के साथ-साथ चीन पर भी नजर रखता है। कई बड़े ऑपरेशंस ‘कश्मीर ऑपरेशन 1947-48’, भारत-चीन युद्ध 1962, इंडो-पाक युद्ध 1965 व 1971, श्रीलंका में ऑपरेशन पवन 1986 और कारगिल में ऑपरेशन सफेद सागर-1999 शामिल है।
इसके अलावा वेस्टर्न एयर कमांड के तहत वायुसेना के कई महत्वपूर्ण और अति संवेदनशील एयरफोर्स स्टेशन हैं, जो हमेशा पाकिस्तान के निशाने पर रहते हैं। युद्ध के दौरान पाक की कोशिश रहती है कि वे सबसे पहले इन्हीं महत्वपूर्ण एयरफोर्स स्टेशनों पर अटैक करे। पठानकोट और अंबाला एयरफोर्स स्टेशनों पर युद्ध के दौरान पाक एयर स्ट्राइक कर भी चुका है, इसलिए वायुसेना प्रमुख ने इन सभी एयरबेसों व लड़ाकू संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।