लगातार तीसरे दिन भी बारिश से कुरुक्षेत्र की मंडियों में किसानों का व एजेंसियों द्वारा खरीदा गया गेहूं भीग गया। सोमवार को थानेसर में 3, लाडवा में 1, शाहाबाद में 3 व इस्माइलाबाद में 2.7 एमएम बारिश हुई। दोपहर करीब डेढ़ बजे से लेकर 2 बजे तक हुई बारिश से जहां गेहूं की खरीद प्रभावित हुई, वहीं मंडी में खुले में रखी गेहूं की बोरियों के नीचे पानी भर गया।
पिहोवा व बाबैन के खरीद केंद्र में बारिश न होने के चलते खरीद कार्य सुचारू रूप से जारी रहा। थानेसर अनाज मंडी के अलावा ब्रह्मसरोवर के आस-पास बनी अस्थाई मंडियों में किसान खुले में पड़े गेहूं को बारिश के बीच तिरपाल से ढक कर बचाने का प्रयास करते रहे। लेकिन बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने तिरपाल उड़ा दी, जिससे गेहूं भीग गया।
लॉकडाउन के चलते इस बार मंडियों में मजदूरों की कमी भारी कमी खल रही है। इस कमी का सीधा असर गेहूं के उठान पर दिखाई दे रहा है। खरीद एजेंसियों द्वारा मंडियों से अभी तक 25 प्रतिशत खरीदे गए गेहूं की उठान हो पाई है।
बारिश से करनाल में गलियां उफान पर।
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किसानों की फसल पर दूसरे दिन भी बारिश और ओलावृष्टि आफत बनकर गिरी तो अन्नदाता के दिलों की धड़कने बढ़ गई। रविवार को हुई बारिश से अभी किसान संभल भी नहीं पाया था कि सोमवार को फिर शहर के जीटी रोड पार पूर्वी क्षेत्र में दोपहर दो बजे बारिश शुरू होने के साथ ही ओलावृष्टि शुरू हो गई। लगभग एक घंटे बारिश के साथ ओले भी गिरे, हालांकि शहरी क्षेत्र व अधिकांश क्षेत्रों में ओलावृष्टि नहीं हुई।
सोमवार को लगा कि आज मौसम साफ रहेगा लेकिन दोपहर होते होते मौसम का मिजाज बदलता चला गया। खेत खलिहानों में तो रविवार की बारिश के बाद से ही कटाई ठहर गई थी। किसान फसल में कुछ धूप लगने के बाद कटाई शुरू कराने की प्रतीक्षा कर रहे थे लेकिन सोमवार को दोपहर बाद बारिश के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि शुरू हो गई। जिसके कारण गेहूं की कटाई का काम शुरू नहीं हो सका।
घरों के बाहर खुले में एकत्र गेहूं भी दोबारा भीग गया। जिले में करीब 1.72 लाख हेक्टेयर गेहूं का रकबा है, जिसमें से करीब 75 प्रतिशत गेहूं की कटाई हो चुकी है। बाकी गेहूं की फसल की कटाई कराना किसानों के लिए चुनौती बन चुका है। बारिश से तमाम कृषि कार्य बंद हो गए। किसान क्लब के प्रदेश महासचिव विजय कपूर ने कहा कि फरवरी, मार्च और अप्रैल में खेती के लिए मौसम खराब रहा।
किसानों का करीब 40 प्रतिशत तक गेहूं की फसल का काम नहीं निपटा। जो फसल हाथ से कटवाई थी, उसकी कतराई नहीं हुई। करीब 15 से 20 प्रतिशत तक कटाई का काम भी रुका हुआ है। अप्रैल के महीने में चौमासा जैसी स्थिति बनी हुई है। मौसम की यही स्थिति रही तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा।