‘मौसम के सटीक पूर्वानुमान के लिए कम से कम दस साल तक इंतजार करना पडे़गा। अभी किसी भी पूर्वानुमान की सटीकता 70 प्रतिशत है। हालांकि पिछले दस सालों में यह काफी बेहतर हुई है। मौसम विभाग का लक्ष्य अगले दस सालों में एक्युरेसी को 85 प्रतिशत करना है।’
यह बात पीजीआई में स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ की ओर से आयोजित एक ट्रेनिंग प्रोग्राम में भारत मौसम विभाग के वैज्ञानिक डा. एम मोहपात्रा ने कही। उन्होंने बताया कि साल 2003 में भारत के पास सिर्फ चार डापलर रडार थे, जबकि वर्तमान में 24 डापलर हैं। साल 2024 तक पूरे देश को डापलर रडार से कवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक दस किलोमीटर की रेंज में आटोमेटेड वेदर स्टेशन, प्रत्येक 100 किलोमीटर पर अपर एयर स्टेशन, प्रत्येक 12 किलोमीटर पर रेज्यूलेशन मॉडल बनाने जाएंगे। इससे देश को काफी फायदा पहुंचेगा। मौजूदा समय में जिला स्तर पर पूर्वानुमान दिए जाते हैं। जब पूरा देश उपकरणों से लैस हो जाएगा, तब ब्लॉक स्तर तक के पूर्वानुमान उपलब्ध करवाए जा सकेंगे।
डॉ मोहपात्रा ने कहा कि पूर्वानुमान में सौ प्रतिशत एक्यूरेसी लाना बहुत मुश्किल हैं, क्योंकि मौसम के पूर्वानुमान की गणना नान लीनियर सूत्र से की जाती है। इतनी तो एक्यूरेसी विश्व में भी नहीं है। हालांकि जैसे-जैसे उपकरण बढ़ते जाएंगे, पूर्वानुमान सटीक होते जाएंगे। पहले सिर्फ एक दिन के पूर्वानुमान बताए जाते थे, लेकिन अब तूफानों के पूर्वानुमान पांच दिन पहले बताए जा रहे हैं। इससे देश को होने वाले नुकसान को काफी हद तक बचाया जा सका है।