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Chandigarh News: 'हमारे पास कोई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति नहीं, चुकानी पड़ सकती है कीमत'

Sun, 03 Dec 2023 01:42 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

मिलिट्री लिट फेस्ट में सैन्य हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई है। यहां पहुंचे लोगों ने खासकर बच्चों ने कई तरह के हथियारों को इस्तेमाल करने और इनकी मारक क्षमता के बारे में अधिकारियों से पूछा।
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Military literature festival: - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सैन्य संबंध के पारिस्थितिकी तंत्र के फलने-फूलने के लिए संवाद, स्पष्टता और सच बोलने की क्षमता चाहिए। हमारे पास कोई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति नहीं है। यह एक ऐसी कमी है, जिसके लिए हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। चंडीगढ़ के लेक क्लब में शनिवार को आयोजित सातवें मिलिट्री लिट फेस्ट में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल मेनन ने आगाह करते हुए यह बात कही।

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दक्षिण एशिया के एकमात्र मिलिट्री लिट फेस्ट-2023 का शनिवार को चंडीगढ़ स्थित लेक क्लब में पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने विधिवत शुभारंभ किया। सत्र में सेना से सेवानिवृत्त कई उच्चाधिकारियों ने पैनल चर्चा में भाग लिया। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर सत्र में ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

लेफ्टिनेंट जनरल मेनन ने कहा कि एक नेतृत्व को प्रतिद्वंद्वी के साथ संघर्ष को निपटाने के लिए बल प्रयोग की उपयोगिता भी पता होनी चाहिए। जब बल का प्रयोग किया जाना हो तो यह महत्वपूर्ण होता है कि हमलावर पर हमला करने के लिए कमजोर प्रतिद्वंद्वी के पास एकमात्र सहारा आतंकवाद की आड़ है।

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उन्होंने केंद्र सरकार के आत्मनिर्भर अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता एक मृगतृष्णा है और आत्मनिर्भर एक नारा मात्र। एक देश को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नेतृत्व के लिए केवल सर्वोत्तम और सबसे सक्षम अधिकारियों को चुना जाए। उन्होंने यूक्रेन पर युद्ध के वास्तविक पहलुओं के बारे में पुतिन को सूचित करने में रूसी सैन्य अधिकारियों की असमर्थता पर दर्शकों के एक सवाल के जवाब में कहा कि पुतिन को बताया गया होगा कि यह आसान काम होगा और ऐसा लगता है कि उनके सैन्य सलाहकारों ने उन्हें गुमराह किया है। यहां हमारे लिए सबक यह है कि हमारे पास ऐसे सैन्य नेता होने चाहिए, जो युद्ध की संभावित लागत और खतरों के बारे में राजनेताओं को सटीक तस्वीर बता सकें।

इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करते हुए ब्रिगेडियर दीपक चौबे ने कहा कि वर्तमान समय में यह आवश्यक हो गया है कि किसी विवाद के समाधान में नीति के सभी उपकरणों का उपयोग किया जाए। 647 दिनों से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध से सीखने लायक सबक यह है कि युद्ध लंबे हो गए हैं और यह राष्ट्रीय संसाधनों को बर्बाद करने का काम करता है, एक ऐसा कारक जिसका मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

सत्र का संचालन मेजर जनरल हरविजय सिंह ने किया, जिन्होंने अपने शुरुआती भाषण में न केवल रूसी-यूक्रेन युद्ध में हुई भारी मानवीय त्रासदी से बचने के लिए व्यापक सबक सीखने की जरूरत बताई, बल्कि पहले से तैयार रहने और चेतावनी देने की भी जरूरत बताई।

पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के ठोस प्रयास युवाओं को सशस्त्र बलों में शामिल होकर मातृभूमि की सेवा करने के लिए प्रेरित करने में सहायक होंगे।

सैन्य हथियारों को देख लोग हुए गौरवान्वित

मिलिट्री लिट फेस्ट में सैन्य हथियारों की प्रदर्शनी लगाई गई है। यहां पहुंचे लोगों ने खासकर बच्चों ने कई तरह के हथियारों को इस्तेमाल करने और इनकी मारक क्षमता के बारे में अधिकारियों से पूछा। इस मौके पर चंडीगढ़ डिफेंस एकेडमी के कैडेट्स को संबोधित करते हुए ले. जनरल एच जे सिंह ने कहा कि मिलिट्री लिटरेचर फेस्टिवल का मकसद सरहदों पर लड़ने वाले वीरों के बलिदान को याद करना है, जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर देश की सेवा की। उन्होंने कहा कि फौजी योद्धाओं की तरफ से देश की सुरक्षा के लिए दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
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