पीजीआई चौक भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है। पानी की लीकेज के नाम पर आए दिन उसकी खुदाई कर ट्रैफिक को धीमा कर दिया जाता है। बीते दो साल में इस चौक की 15 बार खुदाई हो चुकी है। एक बार की खुदाई में कम से कम 60 हजार रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से अब तक 9 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी है।
ताज्जुब इस बात का है कि नगर निगम के इंजीनियरों की भारी-भरकम फौज है, मगर इस समस्या का अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं ढूढ़ा जा सका है। अब सवाल उठने लगा है कि क्या नगर निगम जानबूझ कर इसे ठीक नहीं करना चाहता या उनके पास तकनीक और स्मार्ट इंजीनियर की कमी है। मौजूदा समय में फिर से पीजीआई चौक को खोद दिया गया है। पाइप लाइन तो ठीक हो गई, लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू होने के कारण उस पर सड़क नहीं बनाई जा सकती।
इसलिए होती है चौक की खुदाई
दरअसल, चौक के नीचे पानी की पाइप लाइन गुजर रही है। सेक्टर 12 के वाटर वर्क्स से पाइप लाइन चौक से निकलकर पंजाब यूनिवर्सिटी की ओर जाती है। यह पाइप लाइन करीब 45 साल पुरानी है। इस वजह से यह काफी जर्जर हो चुकी है। दूसरी तरफ सड़क पर वाहनों का दबाव भी काफी ज्यादा है। दबाव पड़ते ही पाइप लाइन टूट जाती है और पानी बहने लगता है। लीकेज को ठीक करने के लिए सड़क की खुदाई तो करनी पड़ेगी। नगर निगम के इंजीनियरों के मुताबिक पूरे चंडीगढ़ को पानी देने के लिए पीजीआई चौराहे पर ही ज्वाइंट लगाया गया है। ज्वाइंट चौराहे से बिल्कुल सटा है, इस वजह से वाहनों का दबाव नीचे तक पहुंचता है, जिससे पाइप टूट जाता है। पाइपों को बदलना ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।
यह है उपाय, लेकिन कोई करने को तैयार नहीं
इसका समस्या का यही उपाय है कि पुरानी पाइप लाइन को बदलकर नई पाइपलाइन डाली जाए। नगर निगम ने पाइप को बदलने के लिए काफी दिनों से टेंडर निकाला हुआ है, लेकिन इस टेंडर को लेने के लिए कोई ठेकेदार तैयार नहीं है। पाइप लाइन बदलने के लिए 15 लाख का टेंडर निकाला गया है। ठेकेदारों का कहना है यह टेंडर पुराना है। अब मैटेरियल के दाम काफी बढ़ गए हैं।
इसके साथ ही लेबर चार्ज भी बढ़ गया है। ऐसे में पुराने ही दाम पर कैसे काम किया जा सकता है। प्रशासन के जेई त्रिलोचन सिंह का कहना है कि स्थायी समाधान के लिए पीजीआई चौक से पंजाब विश्वविद्यालय तक पाइप बदलना होगा। इसके लिए लगभग एक माह तक ट्रैफिक डायवर्ट होगा। वहीं, शहर में पानी सप्लाई के लिए भी नगर निगम को अलग से व्यवस्था करनी होगी, जो बहुत मुश्किल काम है।
सड़क बनने में लगेगा डेढ़ महीना
नगर निगम के जेई विनोद कुमार ने बताया कि अभी चुनाव आचार संहिता जारी है। ऐसे में काम नहीं किया जा सकता है। आचार संहिता खत्म होने के बाद चौक पर काम शुरू किया जाएगा। तब तक लोगों को ऐसे ही मार्ग से निकलना होगा। बड़ी बात यह है कि पीजीआई आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी का सबसे बड़ा सबब है। लोगों का मानना है कि इस चौराहे पर एक माह तक भी सड़क बनी नहीं देखी है। जैसे ही सड़क बनी दस दिन में टूट जाती है।
यहां से प्रतिदिन 50 से 60 एंबुलेंस गुजरती हैं। गंभीर मरीजों को पीजीआई लेकर जा रहे एंबुलेंस चालकों का मानना है कि यहां बड़ी ही सावधानी से गाड़ी चलाने की जरूरत होती है। थोड़ा सा चूके तो मरीज को परेशानी आ सकती है। बड़ी बात यह है अधिकारियों से लेकर पीजीआई तक के डॉक्टर प्रतिदिन चौराहे से होकर गुजरते हैं, लेकिन किसी ने इसका स्थाई समाधान निकालने की ओर ध्यान ही नहीं दिया।
आचार संहिता हटने के बाद पीजीआई चौक पर पाइप लाइन के प्वाइंट पर एक बॉक्स बनाने की तैयारी चल रही है। जिससे कि जब भी ज्वाइंट से पाइप टूटेगा तो पूरी सड़क खोदने की जरूरत नहीं होगी। बॉक्स का ढक्कन खोलकर ज्वाइंट को जोड़ा जा सकेगा। साथ ही पाइप पर जोर न पड़े इसके लिए एक कंक्रीट का स्लैब बनाकर ज्वाइंट के ऊपर लगाया जाएगा, जिससे कि गाड़ियों का भार पाइप पर न पड़े और वह बार बार न टूटे।
- हरीश सैनी, एक्सईएन, नगर निगम
सेक्टर 26 में भी यही हाल
नगर निगम में कार्य करने वाले कर्मचारी बाहर से नहीं आए हैं। सभी यहीं के है। बावजूद इसके अब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं कर सके। यदि शहर हमारा है तो उसका हल निकालने में इतना समय क्यों लग रहा है। इसी प्रकार सेक्टर-26 के चौक का भी यही हाल है। वह भी हमेशा खुदा रहता है।
- राहुल महाजन, सामाजिक कार्यकर्ता