चंडीगढ़ के दोधी पानी मिलाकर धड़ल्ले से दूध बेच रहे हैं। पतले दूध से परेशान लोग इसकी खुद जांच करने के साथ ही खाद्य विभाग को नमूना भेज रहे हैं। खाद्य विभाग ने जनवरी से अब तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों से दूध के 800 नमूने जांचे हैं, जिसमें से 40 प्रतिशत यानी 320 नमूनों में पानी मिलाए जाने की पुष्टि हुई है।
विभाग के लाइसेंसी अधिकारी सुखविंदर सिंह ने बताया कि जांच के दौरान पानी के साथ ही प्रोटीन, फैट और अन्य तत्वों की मात्रा का भी पता चल जाता है। इसके साथ ही मिलावट के लिए प्रयोग किए जाने वाले रसायनों की भी जानकारी मिलती है। लेकिन लिए गए 800 नमूनों में से एक में भी रसायन के प्रयोग की पुष्टि नहीं हुई है। लोग दूध की जांच के लिए जीएमएसएच-16 में स्थित खाद्य विभाग के ऑफिस में नमूना दे सकते हैं। इसके अलावा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में भ्रमण करने वाली विभाग की वैन के जरिए भी जांच कराई जा सकती है।
कड़वा हो जाता है नकली दूध का स्वाद
नकली दूध बनाने के लिए उसमें यूरिया का प्रयोग किया जाता है। फिर थोड़े से असली दूध में सोयाबीन रिफाइंड ऑयल के साथ केमिकल्स मिला दिए जाते हैं। इसके अलावा उसमें कपड़े धोने का डिटर्जेंट, सोडा स्टार्च और वाशिंग पाउडर भी मिलाते हैं। नकली दूध का स्वाद डिटर्जेंट और सोडा मिला होने की वजह से कड़वा हो जाता है।
ये जानकारी भी जरूरी
नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुताबिक दूध में यूरिया, अमोनिया, नाइट्रेट फर्टिलाइजर, शुगर, नमक और ग्लूकोज की मिलावट से दूध की मात्रा के साथ ही एसएनएफ और फैट भी बढ़ जाता है। न्यूट्रलाइजर इसलिए मिलाया जाता है ताकि दूध में खटास पैदा न हो।
ऐसा होता है असली दूध
असली दूध का स्वाद हल्का मीठा होता है। असली दूध स्टोर करने पर अपना रंग नहीं बदलता जबकि नकली दूध कुछ वक्त के बाद पीला पड़ने लगता है। अगर हम असली दूध को उबालें तो इसका रंग नहीं बदलता, वहीं नकली दूध उबालने पर पीले रंग का हो जाता है।
घर में ऐसे करें जांच
दूध की कुछ बूंदों को किसी प्लास्टिक या किसी अन्य वस्तु के प्लेन टुकड़े पर डालें। इसके बाद इसे थोड़ा टेढ़ा करें यदि दूध की बूंद सफेद लकीर छोड़ते हुए धीरे-धीरे बह रहीं हो तो इसका मतलब दूध में पानी की मिलावट नहीं है। वहीं अगर सफेद निशान न छोड़े तो इसका मतलब पानी की मिलावट की गई है। दूध में पानी की मिलावट को जांचने के लिए लेक्टोमीटर का भी प्रयोग किया जा सकता है। इसमें केवल पानी की मिलावट का पता ही चलता है।
खाद्य विभाग का काम कोविड काल में भी प्रभावित नहीं हुआ। खाद्य सामग्रियों की नियमित जांच के साथ ही जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को जानकारी देने व मिलावटी खाद्य पदार्थो के सेवन से बचाने का प्रयास जारी है। -डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य