जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मरने वाले युवाओं को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार को झज्जर जिले के मांडोठी और ग्वालिसन और जींद के दरियावाला गांव में हरियाणा सहित अलग-अलग राज्यों से आए जाट नेताओं ने सरकार को फिर चेताया कि 31 मार्च तक आरक्षण नहीं दिया गया तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। तीन अप्रैल को दिल्ली में 13 राज्यों के जाट इकट्ठा होंगे और आंदोलन की अगली रणनीति का एलान करेंगे।
झज्जर में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश सरकार 31 मार्च तक जाट आरक्षण विधेयक विधानसभा में नहीं पास करा पाई तो मई में नरवाना में राष्ट्रीय स्तर की बैठक कर जेल भरो व चक्का जाम के साथ हरियाणा बंद किया जाएगा और जो भी आंदोलन होगा, उसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार रहेगी।
अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा की ओर से आयोजित श्रद्धाजंलि रैली की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. पवनजीत सिंह बनवाला ने की। बनवाला ने कहा कि एक नेता के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है, लेकिन भाजपा व सरकार के अंदर बैठे कई मंत्री, विधायक व नेता जाट समाज के खिलाफ लगातार जहर उगलते रहे हैं, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
बनवाला ने कहा कि अप्रैल में जाट, पटेल व मराठे दिल्ली के रामलीला मैदान में संयुक्त रैली करेंगे। इस रैली के जरिए आरएसएस को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
जाट नेताओं ने आंदोलन को गुमराह किया: मलिक
मीटिंग में जाट नेता
- फोटो : amar ujala
जींद के दरियावाला गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्र्ीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि सरकार में मौजूद जाट नेता व मंत्रियों ने भी आंदोलन को गुमराह करने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को उसके आसपास मौजूद लोग लगातार गुमराह कर रहे थे, वहीं जाट मंत्री व विधायक आंदोलन को गुमराह करके अप्रैल में ले जाने का प्रयास रहे थे, ताकि गेहूं का सीजन शुरू होने पर आंदोलन विफल हो जाए, लेकिन जाटों ने इन लोगों की मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया।
उन्होंने कहा कि हर हाल में आरक्षण मिलेगा, इसके लिए सरकार के पास 31 मार्च तक का समय है। इससे पहले कोई आंदोलन नहीं किया जाएगा। यदि 31 मार्च तक सरकार ने जाट आरक्षण विधेयक पास नहीं किया तो तीन अप्रैल को दिल्ली में होने वाले देश के जाट पदाधिकारियों की बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
मारपीट ही किसी चीज का इलाज नहीं
मलिक ने कहा कि मारपीट ही हर समस्या का इलाज नहीं है। उन्होंने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी को सरकार नोटिस देने की बता कर रही है, लेकिन सरकार चाहे उस पर कार्रवाई कर या न करे, लेकिन जाटों ने सैनी को 2019 का नोटिस दे दिया है। वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव में सैनी को गांव का प्रधान भी नहीं बनने दिया जाएगा, जबकि किसी दूसरे सैनी भाई को जाट वोट दे सकते हैं।
मलिक ने कहा कि उनके एक बुलावे पर देश के एक लाख सैनी समुदाय के लोग जमा हो सकते हैं, क्योंकि उन्होंने कभी किसी जाति के खिलाफ कोई बयानबाजी नहीं की, वे सभी को अपना भाई मानते हैं। मलिक ने कहा कि वे अपनी कौम के प्रचारक हैं नेता नहीं हैं। उन्हें कभी नेता बनने भी नहीं देना।
आरएसएस प्रमुख के बयान पर साधा निशाना
मीटिंग में जाट नेता
- फोटो : amar ujala
आरएसएस के हरियाणा संघ संचालक मेजर करतार सिंह के पछले दिनों दिए बयान पर मलिक ने कहा कि मेजर करतार सिंह मय्यड़ गांव रहने वाले हैं और उनके ही गांव से वर्ष 2010 में आंदोलन की शुरुआत की थी।
उन्होंने सबसे पहले उन्होंने अपने गांव में आंदोलन करने वाले जाटों की टांगे तुड़वा देनी चाहिए थी। मेजर करतार सिंह के परिवार के लोग भी आंदोलन में शामिल थे और उनका यह बयान अपना चेहरा चमकाने के लिए दिया गया है।
रोहतक में होने वाले समरसरता यज्ञ पर यशपाल मलिक ने कहा कि सही मायनों में समरसता लानी है तो दलितों के घरों में जाकर वे लोग भोजन करे। समरसता को उस समय आएगी जब किसी दलित को आरएसएस अपना प्रमुख बनाएगी। इस तरह के यज्ञों का आयोजन करके जनता को गुमराह करने का प्रयास है और जाट आंदोलन की आड़ में यह लोग अपना चेहरा चमका रहे हैं।
इन फैसलों पर लगी मुहर
-आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट समुदाय के बेकसूर युवाओं पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं
-गिरफ्तार युवाओं को तुरंत रिहा किया जाए।
-आंदोलन में मारे गए लोगों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
-जाटों को बीसी व ओबीसी कैटेगरी में ही आरक्षण दिया जाए।