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हाईकोर्ट का फैसला, अब मनोनीत पार्षद नहीं डाल सकेंगे मेयर चुनाव में वोट

Thu, 24 Aug 2017 09:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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- फोटो : Demo Pic
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नगर निगम की बैठक में वोट डालने के मनोनीत पार्षदों के अधिकार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए समाप्त कर दिया है। अब मेयर चुनावों में बेहद अहम माने जाने वाले इन मनोनीत पार्षदों को मत का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी।
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एक्टिंग चीफ जस्टिस एसएस सारों व जस्टिस अवनीश झिंगन की खंडपीठ ने याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि मनोनीत पार्षद लोकतांत्रिक प्रक्रिया से चुनाव जीतकर नहीं आते। दूसरी तरफ केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि मनोनीत पार्षदों को मतदान का अधिकार मिलना चाहिए।

चंडीगढ़ प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद-243 के तहत चाहे नामित पार्षदों को मताधिकार हासिल नहीं है, लेकिन अनुच्छेद-249 जेडबी के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार है कि वह प्रावधान से केंद्र शासित प्रदेश को छूट दे सकते हैं। इसी अधिकार का इस्तेमाल कर चंडीगढ़ को इस मामले में छूट दी गई है। ऐसे में याचिका को खारिज किया जाए। 
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'चुनाव जीतकर नहीं आते तो वोट का अधिकार क्यों'

- फोटो : File Photo
नगर निगम के पूर्व पार्षद सतिंदर सिंह की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि मनोनीत पार्षदों को मतदान का अधिकार देना मतदाताओं की इच्छाओं का निरादर है। मनोनीत पार्षदों को सरकार चुनती है और ये सदस्य चुनाव जीतकर नहीं आते।

ऐसे में मनोनीत सदस्य मतदाताओं की पसंद नहीं है। इन्हें नगर निगम की बैठक में मतदान का अधिकार देना मतदाताओं की इच्छाओं का निरादर करना है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। मनोनीत सदस्य से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह खुद को चुने जाने वाली व्यवस्था के खिलाफ मतदान करे। ऐसे में व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए मनोनीत सदस्यों को वोटिंग का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।
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