चाहे आधार कार्ड की इनक्वायरी हो या कृषि के छोटे मोटे टिप्स लेना। अगर स्मार्टफोन है तो सबकुछ होगा आपकी मुट्ठी में, लेकिन क्या डाटा यूज में आता है?
सर्वे रिपोर्ट भी यही बताती है कि सिर्फ पंद्रह फीसदी लोग डाटा का उपयोग सही तरह जानते हैं। गांव में तो यह काफी चैलेंजिंग है।
मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर वोडाफोन की पंजाब, हिमाचल और जम्मू कश्मीर के ग्रामीण इलाकों तक डाटा की जानकारी देने के लिए खास डिजाइन की गई बस तैयार है।
यह वैन ग्रामीणों के बीच जाती है और उनको स्मार्टफोन का उपयोग करने की जानकारी देती है। यूआरएल, गूगल और व्हाट्सएप के साथ फेसबुक और अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से उनको बिजनेस बढ़ाने के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
मोबाइल बस के माध्यम से ग्रामीणों को इंटरनेट का पूरा एक्सपीरिएंस दिया जा रहा है। वोडाफोन पंजाब, हिमाचल और जम्मू और कश्मीर के बिजनेस हेड असित शेखर ने बताया कि डाटा प्रोवाइड करने से ज्यादा जरूरी हो गया है इसके बारे में जानकारी देना।
पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कालेज, एग्रीकल्चरल कालेज, एजूकेशनल इंस्टीट्यूट से लेकर ढाबों की जानकारी तक इसमें मिलती है। किसानों को खेती के टिप्स के लिए आवश्यक एप इस दौरान बताए जाते हैं।
असित शेखर ने कहा कि उपभोक्ताओं के लिए रोटो स्टोर (रिटेल फार टूमारो) खोले गए हैं। यह स्टोर ग्राहकों को मोबाइल इंटरनेट के बारे में जानकारी दे रहे हैं।
शेखर ने कहा कि वोडाफोन के इस प्रयास का लाभ यह हुआ कि ग्रामीण इलाकों में लिए जाने वाले डाटा प्लान में पच्चीस फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
डाटा का ही है फ्यूचर
असित शेखर ने कहा कि आने वाला समय डाटा का ही है। गूगल, व्हाट्सएप, फेसबुक और एजूकेशन के संग कृषि की तकनीक भी लोग अपने स्मार्टफोन पर सीखेंगे। उन्होंने कहा कि यह शुरुआत हो चुकी है और कुछ समय बाद यह आवश्यकता हो जाएगी।