राज्य के अकाली नेता लोकसभा चुनाव में हुई हार के बाद भी वीआईपी कल्चर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। एक तरफ तो पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जिला मुखियाओं से लेकर डीसी तक के वाहनों से लाल बत्तियां साहिबानों के बाहनों पर लगी लाल बत्तियां उतरवा दी हैं और अबैध लाल बत्तियों पर भी सख्ती से शिकंजा कसा है, लेकिन अकाली लीड़रों को ऐसे आदेशों की बिल्कुल ही प्रवाह नही है।
सोमवार को अकाली नेता गोबिंद सिंह कांझला एक लाल बत्ता वाली गाड़ी में सवार होकर ड़ीसी दफतर बरनाला पहुंचे, उनके ड्राईवर ने गाड़ी बिल्कुल ड़ीसी कार्यालय के गेट के समक्ष रोककर अकाली नेता गोबिंद सिंह कांझला को उतारा और कांझला गाडी से उतरकर सीधे डीसी साहिब के पास जा बैठे।
उसके बाद ड़ीसी गुरलवलीन सिंह सिद्धू, एड़ीसी अर्शदीप सिंह थिंद इत्यादि उत्चाधिकारी अबैध लाल बत्ती वाली इस गाड़ी के बिल्कुल नजदीक से गुजरे और गाड़ी को ध्यान से देखते भी रहे, लेकिन बह कुछ करने की हिंम्मत नही जुटा पाए। जिससे स्पष्ट था कि कौन रोकेगा अकाली नेता की इस अबैध लाल बत्ती वाली गाड़ी को,क्योंकि राज्य में सरकार है जनाब की।
वर्णनीय है कि अबैध लाल बत्ता लगाकर ड़ीसी कार्यालय पहुंचें गोबिंद सिंह कांझलां पूर्व अकाली मंत्री हैं और विधानसभा हल्का शेरपूर टूटने के बाद नए बनें विधानसभा हल्का महलकलां के हल्का इंचार्ज थोपे गए थे लेकिन बाद में उनकी हल्का इचार्जशिप भंग कर दी गई थी।
अब अकाली नेता गोबिंद सिंह कांझला किसी भी पद् पर नही है। ड़ीसी गुरलवलीन सिंह सिद्धू नें खुद तो अपनी गाड़ी पर पीली बत्ती लगाई हुई है, लेकिन किसी भी पद पर न होने वाले अकाली नेता गोबिंद सिंह कांझलां अबैध तौर पर लाल बत्ती लगाकर डीसी साहिब के समक्ष बैठे रहे क्योंकि जनाब की राज्य में सरकार है और कौन कहे रानी अग्गा ढक।कुल मिलाकर शिअद के महासचिव सुखदेव सिंह ढींड़सा की हार के बाद भी अकाली नेताओं ने कोई सबक नही सीखा।