अग्रवाल भवन में तोड़फोड़ के बाद एंबुलेंस समेत अन्य गाड़ियों को जला दिया था। हिंसा मामले में पुलिस ने कुल 177 एफआईआर दर्ज की थी, इनमें 1137 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। पुलिस को जांच में पुख्ता सबूत नहीं मिलने पर 10 मामलों में दर्ज एफआईआर में नामजद करीब 100 आरोपियों से देशद्रोह की धारा हटानी पड़ी थी। सबूतों के अभाव में दो मामलों में आरोपियों को बरी किया गया।
धारा-144 के उल्लंघन के बाद हिंसा पर उतारू हुए दंगाई
25 अगस्त 2017 को पंचकूला की सीबीआई अदालत की तरफ से साध्वी यौन शोषण मामले में फैसला सुनाने के बाद हिंसा की आशंका बनी थी। पुलिस-प्रशासन ने एहतियातन धारा-144 लगाई थी। बावजूद इसके पुलिस-प्रशासन ने इकट्ठा होती भीड़ को समय रहते न खदेड़ने की भारी लापरवाही की थी।
नतीजतन फैसला आने से पूर्व शहर में राम रहीम के हजारों समर्थकों आ पहुंचे थे और फैसले के बाद हालात ऐसे बिगड़े की आगजनी और हिंसा को अंजाम दिया गया। उपद्रवियों ने ओवी वैन, फायर ब्रिगेड, मीडिया कर्मियों की कारें और दर्जनों टू-व्हीलर में आग लगा दी थी।
बिगड़े हालात को काबू करने के लिए अर्धसैनिक बल और पंचकूला पुलिस को फायरिंग करने समेत आंसू गैस के गोले छोड़ने को मजबूर होना पड़ा था। वे हाथों में हथियार व पेट्रोल बम लेकर बेगू रोड स्थित मिल्क प्लांट में घुस गए और वहां आग लगा दी थी।