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सरकार ने न सुनी तो खुद जुटाए एक करोड़ और बना दिया पुल

Wed, 01 Jul 2015 01:06 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, सिरसा
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कुछ इसी प्रकार का हौंसला सिरसा जिले के 11 गांववासियों ने दिखाया। तीन दशक से घग्गर नदी पर पुल बनाने के वादे को सरकार नजरअंदाज करती रही तो गांववासियों ने खुद ही इसे बनाने की ठान ली।

साथ मिल कर गांववासियों ने कुल एक करोड़ रुपए इकट्ठा किए और इन पैसों से 250 फुट लंबा और 14 फुट चौड़ा पुल बना लिया। यह पुल अलीका और पनिहारी गांवों को जोड़ता है।
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इस पुल का काम अप्रैल 2014 में शुरू हुआ था और अब यह पुल बनने के बिल्कुल करीब है। पुल को बनाने और इसकी देखरेख करने वाली 25 सदस्यों की कमेटी ने स्थानीय संत महंत ब्रह्म दास से इसका उद्घाटन करने की आग्रह किया है।

पूरी तरह तैयार होने के बाद यह पुल 1.25 लाख लोगों की मदद के लिए तैयार हो जाएगा। इससे गांवों से सिरसा की दूरी 30 किमी तक कम हो जाएगी। इन गांव वालों के लिए पंजाब जाना भी आसान हो जाएगा।

घग्गर नदी पर सटे करीब 30 से 35 गांव थे परेशान

दरअसल सिरसा जिला से गुजरने वाली घग्गर नदी पर सटे करीब 30 से 35 गांव के लोग पिछले तीन दशकों से घग्गर के एक तरफ से दूसरे तरफ जाने के लिए नदी के ऊपर से पुल बनाने की मांग कर रहे थे।

उनकी ये मांग कोई भी पूरी नहीं कर सका, इतने लंबे वक्त के इंतजार के बाद आखिरकार इन गांव के लोगों ने सरकार और नेताओ के वादों को दरकिनार कर ठान लिया कि वह खुद ही इस पुल का निर्माण करेंगे।

हारकर घग्गर नदी से सटे लगभग 9 गांवों के लोगों ने चंदा एकत्रित किया और काम शुरू हो गया. अब 14 महीने पहले शुरू हुए इस पुल का निर्माण कार्य पूरा होने वाला है और इसके निर्माण पर अब तक 95 लाख रुपए की लगत आ चुकी है और गांव की पंचायतों ने करीब एक करोड़ रुपए का चंदा एकत्रित किया था।

पनिहारी गांव के हरदेव सिंह बताते हैं, 'पुल का उद्घाटन करने के लिए हमारे गांव में किसी भी नेता या अफसर के लिए कोई जगह नहीं है। देवी लाल से लेकर मनोहर लाल खट्टर तक, हमनें सबके सामने अपनी समस्या रखी।

सिरसा के सांसद चरनजीत सिंह और पूर्व मंत्री गोपाल कांडा ने ही हमारे काम के लिए अपने फंड से क्रमश: एक लाख और साढ़े पांच लाख रुपए दिए। इसके अलावा किसी ने मदद नहीं की।'
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गांव वालों की मेहनत रंग लाई

अलीका गांव के मेजर सिंह कहते हैं, 'राजस्थान जाते समय हमें हनुमानगढ़ में एक इंजीनियर मिले जो सरकारी पुलों के निर्माण का निरीक्षण करते हैं। उनसे लागत की बात करने के बाद हमनें खुद ही पुल बनाने का फैसला लिया।'

आखिरकार गांव वालों की मेहनत रंग लाई, चंदा इकट्ठा होता गया और पुल का निर्माण भी हो गया। गांव के लोगों का तो यहां तक कहना है कि ये पुल वो खुद बना रहे हैं बावजूद इसके कोई भी प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुध लेने नहीं आया।

गांव के लोग पुल का उद्घाटन किसी राजनेता से नहीं कराना चाहते। इसलिए इस समिति ने एक स्थानीय संत महन्त ब्रह्मदास से इसका उद्घटान करने का अनुरोध किया है। सूत्रों के अनुसार यह पुल 1.25 लाख लोगों के लिए वरदान साबित होगा। इससे सिरसा की दूरी 30 किमी कम हो जाएगी। वे आसानी से अपनी उपज को पंजाब की मंडियों में बेच सकेंगे।

गांव के हरदेव सिंह कहते हैं कि पुल के निर्माण के लिए हर किसी ने अपनी हैसियत से चंदा दिया। एक दिहाड़ी मजदूर ने 500 रुपए दिए तो एक विधवा ने अपनी पेंशन में से 1,000 रुपए।
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