चंडीगढ़। पेंडू संघर्ष कमेटी चंडीगढ़ ने मंगलवार को सेक्टर-17 के ब्रिज मार्केट में पानी की बढ़ी दर सहित अन्य मांगों को लेकर धरना दिया। इसमें चंडीगढ़ के सभी गांवों के लोग शामिल रहे। धरना दे रहे लोगों ने नगर निगम और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इसमें भारी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं। पेंडू संघर्ष कमेटी ने एसडीएम को एक ज्ञापन सौंपा। मांग पत्र लेने के लिए एसडीएम धरनास्थल पर पहुंचे।
इस दौरान पानी की बढ़ी दर का गांव के लोगों ने विरोध किया। लोगों ने कहा कि कोरोना के चलते पहले ही आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। इस दौर में सरकार को सुविधा देनी चाहिए थी, लेकिन प्रशासन और नगर निगम ने पानी के दाम तीन गुना बढ़ा दिए। यह किसी भी तरह से ठीक नहीं है। इससे गांव की हालत और खराब होगी। धरने के दौरान सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास कर बिजली विभाग के निजीकरण का विरोध किया गया। प्रस्ताव में कहा गया कि प्रशासन का यह फैसला लोक और कर्मचारी विरोधी है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि बिजली विभाग का निजीकरण न किया जाए।
धरने को पेंडू संघर्ष कमेटी के संरक्षक बाबा साधु सिंह, बाबा गुरदियाल सिंह, प्रधान नंबरदार दलजीत सिंह पलसौरा, महासचिव गुरप्रीत सिंह सोमल, जोगिंदर सिंह, जुझार सिंह बडहेड़ी के अलावा यूटी पावरमैन यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, चंडीगढ़ पंजाबी मंच के महासचिव देवी दयाल शर्मा, फॉसवेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने संबोधित किया।
यह्य हैं मांगें
पानी की बढ़ी दर और सीवर सेस वापस लिया जाए। पानी के बिल दो महीनों की जगह एक महीने का भेजा जाए। नियमित मीटर रीडिंग के अनुसार बिल भेजे जाएं। औसत बिल भेजना बंद हो। गांव में बनी दुकानें और व्यापारिक अदारों में जहां पानी की खपत होती हो, उसी का बिल भेजा जाए। ऐसी दुकानों में अलग से मीटर लगाया जाए। आवासीय मकानों पर लगाए व्यापारिक बिल बंद किए जाएं। उनसे घरेलू दर पर ही बिल लिया जाए। चंडीगढ़ में पानी की लीकेज और चोरी बंद हो। पानी का बिल आखिरी तारीख से 10 दिन पहले भेजा जाए। गांव के अंदर जरूरत के अनुसार पानी की आपूर्ति बढ़ाई जाए। सिंचाई का प्रबंध शुल्क मुक्त किया जाए।