लंदन ओलंपिक में जीत के बाद पराजित घोषित किए गए मुक्केबाज विकास कृष्ण यादव का इस बार तकनीक पर खास फोकस है। रियो ओलंपिक में प्रतिद्वंद्वी मुक्कबाजों के मजबूत पक्ष की काट को ध्यान में रखते हुए विकास प्रैक्टिस कर रहे हैं। लंबे-नाटे कद के पार्टनर अलावा जिन मुक्केबाजों की आक्रामक व रक्षात्मक शैली है, उनके साथ विकास कृष्ण हररोज छह से आठ घंटे पसीना बहा रहे हैं।
बकौल विकास, रिंग में उसके सामने कौन है, उसी समय रणनीति बनेगी कि प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ आक्रामक खेला जाना है या फिर रक्षात्मक। यह सब रिंग में ही तय होगा। बहरहाल, वह हर तरह की कद-काठी के पार्टनर मुक्केबाजों के साथ प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने आर्मी, रेलवे, एयर फोर्स से ऐसे पार्टनर मुक्केबाज बुलाए हैं, जिनका कोई न कोई पक्ष मजबूत है।
इस समय वह आठ-नौ ऐसे पार्टनर मुक्केबाजों के साथ सुबह-शाम प्रैक्टिस कर रहे हैं। बस अब केवल चंद दिन ही तो बचे हैं। दिमाग में केवल दो चीज हैं-प्रैक्टिस व रेस्ट। विकास लंदन ओलंपिक में हाथ आए पदक के फिसलने की घटना को भूल जाना चाहते हैं। कहते हैं, उस वक्त उनका कैरियर में अनुभव के दो साल थे। आज उनके अनुभव में चार साल और जुड़ गए हैं।