हरियाणा मंत्रिमंडल की अनौपचारिक बैठक में बराला प्रकरण छाया रहा। पूरे घटनाक्रम व राजनीतिक हालात पर सीएम मनोहर लाल ने मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद इस मुद्दे को लेकर चर्चा पर मंत्रियों के अलग-अलग सुर नजर आए।
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार कुछ भी बोलने से बचे तो शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा और राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने नपे-तुले शब्दों में सरकार और अपनी बात रखी। बेदी ने बराला का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष या भाजपा सांसद राजकुमार सैनी के मांगने से सुभाष बराला क्यों इस्तीफा देंगे। इस्तीफा देना है तो पहले सैनी दें, उनसे जनता कब से इस्तीफा मांग रही है। मामले को हरियाणा से जोड़ने पर बेदी के तेवर कड़े दिखे।
उन्होंने कहा कि मामला चंडीगढ़ से जुड़ा है, इसे हरियाणा से न जोड़ा जाए। पुलिस केस में न तो सीएम, न किसी मंत्री और न ही सरकार ने कोई हस्तक्षेप किया है, न ही करेंगे। यूटी की पुलिस और प्रशासन अलग है, उससे हरियाणा का कोई ताल्लुक नहीं। हरियाणा भाजपा अध्यक्ष व विधायक सुभाष बराला ने भी मामले को प्रभावित करने का कोेई प्रयास नहीं किया है। सोशल मीडिया पर बेवजह मामले को तूल दिया जा रहा है। कानून अपना काम कर रहा है, किसी को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि न तो वह मामले से जुड़ी युवती की किसी बात का खंडन कर रहे हैं, न उसे सराहनीय बताएंगे, न ही मनोबल तोड़ने की कोशिश करेंगे। चूंकि, रोहतक की दो बहनों के मामले में जल्दबाजी में घोषणा पर सीएम और सरकार को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं छोड़ा गया था।