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विजिलेंस ने पूर्व सीएम हुड्डा के खिलाफ दर्ज की FIR

Sat, 19 Dec 2015 06:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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औद्योगिक प्लाट आवंटन में अनियमिता मामले में विजिलेंस ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। मामले में हुडा के पूर्व चेयरमैन, पूर्व आईएएस डीपीएस नागल, मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कांसल व हुडा के ही अन्य अधिकारी बीबी तनेजा व 13 प्लाट धारकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की।
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ऐसा हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर के आदेश पर किया गया। मामले में विजिलेंस ब्यूरो ने जांच की थी और सरकार को दी रिपोर्ट में कहा था कि प्लाट ऐसे व्यक्तियों को दे दिए गए जो तकनीकी योग्यता पूरी नहीं करते थे। इस रिपोर्ट पर सरकार ने एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन से कानूनी राय मांगी थी।

कानूनी राय में उन्होंने सिफारिश की थी कि इस मामले में एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए और सीबीआई जैसी किसी स्वतंत्र एजेंसी से आगामी जांच कराई जाए। इसी पर खट्टर ने विजिलेंस ब्यूरो को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था और शनिवार को एफआईआर दर्ज कर ली गई। उल्लेखनीय है कि नियमानुसार शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं और प्लाट आवंटन में गड़बड़ी पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समय वर्ष 2013 में हुई थी।
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एजी ने यह कानूनी राय दी थी

प्लाट को आवेदन करने की अंतिम तिथि से ठीक पहले आवंटन प्रक्रिया में हुड्डा ने बतौर चेयरमैन अपने स्तर पर बदलाव किया। जिन्हें प्लाट आवंटित किए गए, वह इंटरव्यू तक की योग्यता पूरी नहीं करते थे और उनके फार्मों के कुछ कालम खाली छोड़ दिए गए।

इसके अलावा फार्मों के साथ कुछ जरूरी दस्तावेज भी नहीं लगे थे। इंटरव्यू में इन्हें अधिक अंक दे दिए गए। कानूनी राय में एजी ने कहा था कि अपने नजदीकियों को प्लाट देने के  लिए की गई कथित अनियमितताओं का यह फिट केस है, जिसमें एफआईआर दर्ज करनी बनती है।

हाईकोर्ट में याचिका के बाद हुई कार्रवाई
जुलाई 2013 में पंचकूला में आवंटित किए 14 बेश्कीमती औद्योगिक प्लॉट आवंटन को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। आरोप था कि तत्कालीन सीएम हुड्डा ने अपने चहेतों को प्लाट देने के लिए प्रक्रिया को दत्ता बताया। प्लाट पाने वाले व्यक्ति योग्यताएं पूरी नहीं करते थे और बेश्कीमती प्लाट काफी कम कीमत में दे दिए गए।

हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया था और आखिर आवंटन की विजिलेंस जांच का आश्वासन दिया था। अभी मामला विचाराधीन है और सरकार ने जांच मुकम्मल करके रिपोर्ट दाखिल करने की अंडरटेकिंग दे रखी है। सुनवाई 28 जनवरी को होनी है।
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इन्हें मिले थे प्लॉट

हुड्डा के समधि व पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल के रिश्तेदार ओपी दहिया, हुड्डा परिवार की नजदीकी रही रेणू हुड्डा, मुख्यमंत्री के ओएसडी रहे बीआर बेरी की पुत्रवधु मोना बेरी, मुख्यमंत्री के सचिव रहे सिंह राम के बेटे प्रदीप कुमार, सीनियर डिप्टी एडवोकेट जनरल के पारिवारिक सुनील कत्याल के पारिवारिक सदस्य डागर कत्याल, थानेसर के पूर्व विधायक रमेश गुप्ता के बेटे अमन गुप्ता, केयू विवी के उपकुलपति के पारिवारिक सदस्य कंवरप्रीत संधू, एडिशनल एजी प्रभजीत की पत्नी मनजोत कौर, सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल नरेंद्र हुड़्डा की पत्नी नंदिता हुड्डा, फोर्टिंस अस्पताल के कंस्लटेंट रहे डाक्टर गणेश दत्त रत्न (हुड्डा केनजदीकी), वाईपीटी एंटरटेनमेंट हाऊस के मालिक सिद्धार्थ भारद्वाज, हुड्डा के नजदीकी अशोक काका के दामाद अशोक वर्मा।
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