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विजिलेंस के हत्थे चढ़े तो हाथ जोड़ हंसते नजर आए PTU के पूर्व वीसी, करोड़ों के घोटाले का आरोप

Tue, 09 Jan 2018 10:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़/कपूरथला
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Dr Rajnesh Arora former Vice Chancellor
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आईके गुजराल पंजाब तकनीकी विश्वविद्यालय (पीटीयू) कपूरथला के पूर्व वीसी डा. रजनीश अरोड़ा आखिर सोमवार को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के हत्थे चढ़ गए। उनको अपने कार्यकाल के दौरान विश्वविद्यालय में वित्तीय एवं प्रबंधकीय अनियमितताओं के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
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वर्ष 2012-13 के दौरान पीटीयू में वित्तीय और प्रबंधकीय अनियमितताओं संबंधी विस्तृत जांच रिपोर्ट अगली कार्रवाई के लिए पंजाब तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा विजिलेंस ब्यूरो को सौंपी गई थी। उस पर कानूनी राय लेने के बाद विजिलेंस ने डॉ. रजनीश अरोड़ा समेत 10  के खिलाफ भादंसं की धारा 409, 120 बी और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (1)(डी) व 13 (2) के अंतर्गत जालंधर स्थित विजिलेंस ब्यूरो के थाने में मुकदमा दर्ज किया है। विजिलेंस के प्रवक्ता ने बताया कि मामले की जांच के दौरान इन आरोपियों के अलावा सामने आए तथ्यों और अन्य अधिकारी व कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।

पीटीयू में विभिन्न अनियमितताओं की जांच में यह सामने आया कि अरोड़ा ने पहले तो छह कॉर्डिनेटर व फेसिलिटेटर (सीएंडएफ) की नियुक्ति बिना किसी विज्ञापन के मनमर्जी से कर दी। बाद में इन छह सीएंडएफ को वर्ष 2012-13 में 2,73,20,000 रुपये और वर्ष 2013-14 में 6,53,50,000 रुपये का भुगतान भी किया। इस मामले पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने संज्ञान लेते हुए वीसी को नियुक्तियों में तय प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
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उसके बाद विश्वविद्यालय ने 12 सीएंडएफ रखने का विज्ञापन तो जारी किया लेकिन नियुक्तियां करते समय विश्वविद्यालय द्वारा गठित चयन कमेटी की सिफारिशों को नज़रअंदाज करके मैसर्ज एनईटीआईआईटी  द्वारा तत्कालीन निदेशक (डीडीई) को भेजी ई-मेल के आधार पर ही ये नियुक्तियां कर दी गईं। अरोड़ा ने ये नियुक्तियां करके न केवल विश्वविद्यालय के नियमों की उल्लंघना की बल्कि जिन फर्मों को चयन कमेटी ने विश्वविद्यालय के विज्ञापन के अनुसार शर्तें पूरी करने पर मेरिट सूची में शामिल किया था, उन्हें नियुक्ति नहीं दी। इनमें से चार मामलों में चयन कमेटी की सिफारिश से इतर फर्मों को नियुक्ति दी गई। यहां तक कि एक फर्म की नियुक्ति तो प्रतीक्षा सूची में से कर दी गई। 

भरती का विज्ञापन नहीं, फिर भी होती रही नियुक्तियां

Dr Rajnesh Arora former Vice Chancellor
भरती का विज्ञापन नहीं, फिर भी होती रही नियुक्तियां
भर्ती संबंधी धांधलियों का खुलासा करते हुए विजिलेंस प्रवक्ता ने बताया कि पीटीयू में डा. नच्छत्तर सिंह सलाहकार (डेपूटेशन) और डा. आरपी भारद्वाज डायरेक्टर (कांट्रैक्ट) को नियुक्त करने से पहले यूनिवर्सिटी ने कोई विज्ञापन नहीं निकाला और ना ही किसी अन्य यूनिवर्सिटी/संस्थान में इस पद पर भर्ती संबंधी कोई सर्कुलर भेजा। इस तरह इन पदों पर डा. नच्छत्तर और डा. भारद्वाज को सीधे भर्ती कर लिया गया।

इनके अलावा विश्वदीप सहायक रजिस्ट्रार (एडहॉक), मरगिंदर सिंह बेदी सहायक प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अफ़सर और सुमीर शर्मा सहायक निदेशक सांस्कृतिक गतिविधियां को अनुबंध के आधार पर नियुक्त करते समय भी नियमों की अनदेखी की गई। बाद में इनके कार्यकाल में समय-समय पर विस्तार करने के लिए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा 10 अप्रैल, 2013 को 49वीं बोर्ड मीटिंग में लिए फ़ैसले का भी उल्लंघन किया गया।

जांच में सामने आया है कि लीगल अफसर (रेगुलर) गीतिका सूद, जो कि पूर्व भाजपा मंत्री तीक्ष्ण सूद की बेटी है, ने अपने आवेदन के साथ कोई भी ऐसा दस्तावेज़ नहीं लगाया, जिससे साबित हो कि वह कार्यालयीन/यूनिवर्सिटी अकादमी और प्रबंधकीय मामलों संबंधी लीगल प्रैक्टिशनर काम करने का अनुभव रखती हैं। तथ्यों के अनुसार यह नियुक्ति आवश्यक अनुभव सर्टिफिकेट के बिना ही कर दी गई। इसी प्रकार आशीष शर्मा प्रोग्रामर (रेगुलर) भी नियुक्ति के समय इस पद के लिए आवश्यक अनुभव पूरा नहीं करता था।
 

दोस्त को सलाहकार बनाया, उसकी कंपनी को दिए 24.37 करोड़ 

Dr Rajnesh Arora former Vice Chancellor
दोस्त को सलाहकार बनाया, उसकी कंपनी को दिए 24.37 करोड़ 
डा. अरोड़ा ने अपने सहपाठी प्रवीन कुमार को मैसर्स एनईटीआईआईटी के लिए सलाहकार नियुक्त करके उसकी कंपनी को मोटी राशि अदा कर दी। जांच के दौरान उक्त सलाहकार की नियुक्ति और अदायगियों के खुलासे में यह भी साफ हो गया कि इस नियुक्ति के संबंध में कोई विज्ञापन भी नहीं दिया गया था और इससे संबंधी सेवाएं आउटसोर्स करने संबंधी उपबंधता प्रणाली को भी नहीं अपनाया गया।

विजिलेंस के अनुसार, पीटीयू और मैसर्स एनईटीआईआईटी के बीच 27 अगस्त, 2012 को हुए इकरारनामे के अनुसार उक्त फर्म को दाख़िला फीस का 8 प्रतिशत कन्सलटेंसी फीस के तौर पर दिया जाना तय हुआ था। यह दाख़िला फीस का 8 प्रतिशत हिस्सा रीजनल सेंटरों और लर्निंग सेंटरों को होने वाली अदायगी के हिस्से में से दिया गया।

10 सितंबर, 2012 को मुख्य सचिव पंजाब-कम-चेयरमैन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स पीटीयू ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर किए एक हलफऩामे में साफ किया कि उनके द्वारा  यूनिवर्सिटी को कन्सलटेंट की नियुक्ति को तुरंत वापस लेने की हिदायत की गई थी, लेकिन यह नियुक्ति वापस नहीं ली गई और प्रवीन कुमार को दिसंबर 2014 तक भी कार्यों की लगातार अदायगी होती रही जो कुल 24,37,32,616 रुपये की गई। जांच के दौरान उक्त फर्म द्वारा यूनिवर्सिटियों को प्रदान की सेवाओं के बारे में संबंधित विभागों द्वारा कोई विवरण भी उपलब्ध नहीं करवाए गए।
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दिल्ली कैंप आफिस खोलकर उड़ा दिए पौने दो करोड़ रुपये

Dr Rajnesh Arora former Vice Chancellor - फोटो : File Photo
पुलिस लाइन कपूरथला में 5.60 लाख में लगवा दीं सोलर लाइटें
विजिलेंस प्रवक्ता के अनुसार पुलिस लाइन कपूरथला में पिल्लरों समेत सोलर लाइटें लगवाने पर यूनिवर्सिटी ने 5.60 लाख रुपये खर्च कर दिए जो कि यूनिवर्सिटी एक्ट की धारा 4 (17) के विरुद्ध था। पीटीयू द्वारा इस राशि की मंज़ूरी 8 नवंबर, 2012 में की गई, हालांकि इस अदायगी को लेकर गठित कमेटी के कुछ सदस्यों ने असहमति भी जताई थी। फिर भी यूनिवर्सिटी द्वारा इस राशि की अदायगी कर दी गई। अफसोसजनक यह रहा कि इससे संबंधी फाइल भी बाद में खुर्द-बुर्द कर दी गई।

दिल्ली कैंप आफिस खोलकर उड़ा दिए पौने दो करोड़ रुपये
डा. रजनीश अरोड़ा और मैसर्स एनईटीआईआईटी की मिलीभगत से दिल्ली कैंप ऑफिस खोलकर 1,65,52,562.63 रुपये की फि?ूलख़र्ची की गई। उन्होंने धरिंदर तायल के चंडीगढ़ में स्थापित किये डायरेक्ट लर्निंग सेंटर में इसी यूनिवर्सिटी के दूसरे लर्निंग सेंटरों के मुकाबले अधिक फीस चार्ज करने की आज्ञा भी दी। इस तरह धरिंदर तायल द्वारा चलाए जा रहे एनोवायस इंस्टीट्यूट ऑफ क्लीनिकल रिसर्च को वित्तीय लाभ पहुंचाया गया। डा. अरोड़ा ने यूजीसी द्वारा स्पष्टीकरण दिए जाने के बाद भी उक्त इंस्टीट्यूट को पीटीयू के सीमा क्षेत्र से बाहर यानी चंडीगड़ से संस्था चलाने की मंज़ूरी दी। 
 
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