डीएसपी- अच्छी बात है मगर मेरी बात सुनो।
हेड कांस्टेबल- आज तो मैं भाईचारे के नाते, इंसानियत के नाते छोड़ रहा हूं। ये आईडी कार्ड आपका ओरिजनल है या कॉपी है।
डीएसपी- ये तो कॉपी है, ओरिजनल तो मेरे पास है।
हेड कांस्टेबल- हां, आपने इस तरह कॉपी करके किसी और को भी दिया हुआ है क्या ?
डीएसपी- नहीं, किसी और को नहीं दिया हुआ है।
हेड कांस्टेबल- सर, रिक्वेस्ट है आपसे, आइंदा इस तरह पकड़े गए तो मैं छोडूंगा नहीं।
डीएसपी- जी।
हेड कांस्टेबल- मेरे को आज एक शख्श डीजीपी से बात करवा रहा था पर मैंने नहीं छोड़ा। उसका भी 10 हजार का चालान किया है। भाईचारे में तो कोई बेशक मेरी गर्दन उतार ले।
डीएसपी का बेटा (फोन के स्पीकर पर चल रही बातचीत में) - नहीं करेंगे, दोबारा ऐसी गलती।
हेड कांस्टेबल- दोबारा ऐसी गलती नहीं करना, वरना जिस जेल के सुपरिंटेंडेंट हो, उसके कैदी बनने में देर नहीं लगती।
डीएसपी- ठीक है, ठीक है।
हेड कांस्टेबल- थैंक्यू सर
डीएसपी- थैंक्स टू यू, थैंक्यू
हेड कांस्टेबल- कार्ड को जब्त कर रहा हूं।