सिद्धू ने यह भी वादा किया था कि वह मारे गए लोगों के परिवारों का खर्च उठाएंगे। उस वादे को भी पूरा नहीं किया गया। युवक का कहना है कि इस हादसे के बाद सभी पीड़ित परिवार तीन महीने तक सिद्धू की कोठी में आकर मिलने की कोशिश करते रहे लेकिन उनके दफ्तर के कर्मचारी यह कह कर भेज देते कि सिद्धू चंडीगढ़ में बैठक में व्यस्त हैं।
सिद्धू के पास अपने ही विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ मिलने का समय नहीं है। सिद्धू के पास पांच मिनट का समय उनसे मिलने का नहीं था। पीड़ित परिवारों का कहना था कि उन्होंने कई बार अपने दु:ख-तकलीफ सुनाने के लिए नवजोत सिद्धू को जौड़ा फाटक के नजदीक आने के लिए आग्रह किया लेकिन उन्होंने कभी उनकी बात नहीं सुनी। इसलिए वह मजबूर होकर सिद्धू की कोठी में अपना दुखड़ा सुनाने के लिए आए हैं।
बच्चों की सुध नहीं ली सिद्धू परिवार ने
इस धरने में अपने तीन वर्ष के बेटे के साथ शामिल हुई एक महिला ने बताया कि जब हादसा हुआ था, तब डॉ. सिद्धू ने उनके बच्चों को हरसंभव मदद का वादा किया था। इस महिला का पति हादसे का शिकार हो गया था। उसने बताया कि सरकार ने जो पांच लाख की मदद दी थी, वह भी उसके जेठ को मिली। जेठ ने उसे दो लाख ही दिए हैं। उसके बच्चे को न गोद लिया गया, न शिक्षा का प्रबंध किया गया। एक व्यक्ति ने कहा कि इस हादसे में उसका बेटा मारा गया था। उसकी बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त है। सिद्धू ने उसको नौकरी देने का वादा किया था जो पूरा नहीं हुआ है।
आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करे सरकार
इन परिवारों का कहना था कि सरकार अभी तक इस हादसे के आरोपियों को कानूनी कटघरे में खड़ा नहीं कर सकी है। सरकार की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। सरकार पार्षद मिट्ठू मदान और रेल अधिकारियों के विरुद्ध कोई भी करवाई करने में असफल रही है। इन आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।