फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विरोध-प्रदर्शनः अमृतसर रेल हादसे के पीड़ित परिवारों का फूटा गुस्सा, नवजोत सिंह सिद्धू का घर घेरा

Sun, 29 Sep 2019 10:30 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
विज्ञापन
सिद्धू के घर के बाहर धरने पर बैठे परिजन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

दशहरा के दिन पिछले साल अमृतसर के जौड़ा फाटक के पास दर्दनाक रेल हादसा हुआ था। हादसे में मारे गए 60 से अधिक लोगों के परिजनों ने वादा पूरा न करने को लेकर पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के हौली सिटी स्थित आवास को चारों तरफ से घेर लिया। हादसे के पीड़ित परिवार सिद्धू के घर के मुख्य गेट पर बैठ गए।

विज्ञापन


सुरक्षा कर्मचारियों ने घर के सभी प्रवेश द्वारा बंद कर दिए और पीड़ित परिवारों को स्पष्ट कर दिया कि जब तक दफ्तर का स्टाफ नहीं आएगा, तब तक कोठी के गेट नहीं खोले जाएंगे। वहीं पीड़ित परिवारों ने स्पष्ट कर दिया जब तक सिद्धू उनके साथ बैठक नहीं करेंगे, तब तक वह कोठी के बाहर बैठे रहेंगे। आठ अक्तूबर को दशहरे पर पीड़ित परिवार जौड़ा फाटक पर ट्रैक पर बैठेंगे। वह सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते लेकिन यह भी सच है कि इसके बिना आवाज नहीं सुनी जाती।   

सिद्धू की कोठी के बाहर धरने पर बैठे पीड़ित परिवार के एक सदस्य सुरिंदर ने कहा कि इस हादसे के बाद नवजोत सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ. नवजोत कौर ने जो वादे किये थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। पंजाब सरकार द्वारा घोषित की गई पांच लाख की राशि उन्हें मिली है।
विज्ञापन


सिद्धू ने इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी देने का वादा किया था लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उसे पूरा नहीं किया गया। उसके अनुसार सिद्धू ने उन सभी बच्चों को गोद लेने की घोषणा की थी, जिन परिवारों से कमाने वाले सदस्य हादसे का शिकार हो गए थे। लेकिन सिद्धू एक भी पीड़ित परिवार के सदस्य को गोद नहीं ले सके। 

Trending Videos
विज्ञापन

सिद्धू ने यह भी वादा किया था कि वह मारे गए लोगों के परिवारों का खर्च उठाएंगे। उस वादे को भी पूरा नहीं किया गया। युवक का कहना है कि इस हादसे के बाद सभी पीड़ित परिवार तीन महीने तक सिद्धू की कोठी में आकर मिलने की कोशिश करते रहे लेकिन उनके दफ्तर के कर्मचारी यह कह कर भेज देते कि सिद्धू चंडीगढ़ में बैठक में व्यस्त हैं।

सिद्धू के पास अपने ही विधानसभा क्षेत्र के लोगों के साथ मिलने का समय नहीं है। सिद्धू के पास पांच मिनट का समय उनसे मिलने का नहीं था। पीड़ित परिवारों का कहना था कि उन्होंने कई बार अपने दु:ख-तकलीफ सुनाने के लिए नवजोत सिद्धू को जौड़ा फाटक के नजदीक आने के लिए आग्रह किया लेकिन उन्होंने कभी उनकी बात नहीं सुनी। इसलिए वह मजबूर होकर सिद्धू की कोठी में अपना दुखड़ा सुनाने के लिए आए हैं।  

बच्चों की सुध नहीं ली सिद्धू परिवार ने 
इस धरने में अपने तीन वर्ष के बेटे के साथ शामिल हुई एक महिला ने बताया कि जब हादसा हुआ था, तब डॉ. सिद्धू ने उनके बच्चों को हरसंभव मदद का वादा किया था। इस महिला का पति हादसे का शिकार हो गया था। उसने बताया कि सरकार ने जो पांच लाख की मदद दी थी, वह भी उसके जेठ को मिली। जेठ ने उसे दो लाख ही दिए हैं। उसके बच्चे को न गोद लिया गया, न शिक्षा का प्रबंध किया गया। एक व्यक्ति ने कहा कि इस हादसे में उसका बेटा मारा गया था। उसकी बेटी उच्च शिक्षा प्राप्त है। सिद्धू ने उसको नौकरी देने का वादा किया था जो पूरा नहीं हुआ है। 

आरोपियों को कानून के कटघरे में खड़ा करे सरकार 
इन परिवारों का कहना था कि सरकार अभी तक इस हादसे के आरोपियों को कानूनी कटघरे में खड़ा नहीं कर सकी है। सरकार की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। सरकार पार्षद मिट्ठू मदान और रेल अधिकारियों के विरुद्ध कोई भी करवाई करने में असफल रही है। इन आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज हुआ है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें