पंजाब विश्वविद्यालय में वेरका बूथ पर डेयरी प्रोडक्ट के साथ अब राशन भी बेच रहा है। इसकी पीयू से अनुमति मिली नहीं है। यही नहीं पीयू के इस बूथ का संचालन खुद वेरका को ही करना था, लेकिन इसको ठेके पर किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया। इसका नुकसान शिक्षकों व कर्मचारियों को हो रहा है।
आरोप है कि वेरका सीधे अपने प्रोडक्ट शिक्षकों या कर्मचारियों को देगा तो वह सस्ते दामों पर, लेकिन ठेके पर संचालन होने के कारण यही प्रोडक्ट महंगे हो गए हैं। बिल भी वेरका के नाम से न दिए जाने की बात सामने आई है। जानकारों का कहना है कि पीयू को हर साल इस व्यवस्था से करोड़ों रुपये को चूना लग रहा है।
कर्मचारी नेता विनय सिंह, राजकुमार समेत कई लोगों का आरोप है कि पीयू ने वेरका को ही सेक्टर 14 की मार्केट में दुकान नंबर 31 अलाट की थी। वेरका को ही इसका पूरी तरह संचालन करना था। साथ वेरका के ही प्रोडक्ट बेचे जाने थे। आरोप है कि वेरका की जगह कोई अन्य व्यक्ति इसका संचालन कर रहा है। कई वर्षों से यहां कर्मचारी भी काम कर रहे हैं।
इसकी लीज खत्म होती है तो फिर रिन्यू करवा लिया जाता है जबकि नियमों को देखा ही नहीं जा रहा है। इस दुकान का किराया सामान्य वसूला जा रहा है, जबकि इनकम लाखों रुपये में है। शिक्षकों व कर्मचारियों को यहां वेरका की ओर से आइटम दिए जाते तो सस्ते दाम में मिलते। अब ठेके पर व्यवस्था होने के कारण कमीशन का खेल चलता है।
लॉकडाउन शुरू हुआ तो कुछ दिन व्यवस्था बाधित रही, लेकिन बाद में यह शॉप खुल गई। आरोप है कि यहां अब डेयरी प्रोडक्ट के अलावा आटा, तेल, चावल से लेकर कई तरह के राशन मिल रहे हैं। पीयू प्रशासन को इसकी शिकायत की गई है। साथ ही कार्रवाई की मांग की है।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यहां वेरका के ही संचालक काम करें न कि कोई ठेकेदार। उन्हें हटाया जाए। वेरका बूथ संचालक संजीव वालिया कहते हैं कि लीज रिन्यू हो गई है। बाकी सवाल किए तो उन्होंने फोन काट कर बंद कर दिया।
मेरे पास शिकायत पहुंची तो मैंने इसकी जांच के लिए कर्मचारी भेजे हैं। जैसे ही रिपोर्ट मिलेगी कार्रवाई होगी। नियमों के मुताबिक यदि काम नहीं किया जा रहा है तो भी कार्रवाई होगी।
- प्रो. करमजीत सिंह, रजिस्ट्रार पीयू