कर्फ्यू के इस समय में प्रशासन दावे कर रहा है कि सख्त ताकीद की गई है कि कोई भी दुकानदार या सब्जी विक्रेता किसी भी ग्राहक के साथ कालाबाजारी नहीं करेगा लेकिन इन दावों की सच्चाई यह है कि लोगों को दोगुने रेटों में सब्जियां, राशन व आटा मिल रहा है। जिससे लोगों की जेबों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। लेकिन मजबूरीवश लोग यह सामान खरीदने को मजबूर हैं।
कर्फ्यू से पहले तक जहां आलू 20 रुपये, प्याज 35 रुपये, गोभी 20 रुपये, गाजर 20 रुपये, अदरक 120 रुपये, लहसुन 120 रुपये, भिंडी 50 रुपये, मटर 50 रुपये किलो तक मिल रहा था, वहीं अब आलू का रेच 50 रुपये, प्याज 60 रुपये, गोभी 40 रुपये, गाजर 40 रुपये, अदरक 200, लहसुन 200, भिंडी 120, मटर 100 रुपये प्रति किलो तक बिकने लगा है।
यही नहीं दुकानदारों की ओर से राशन भी महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। पांच किलो आटा 350 रुपये तक मिल रहा है। इससे लोग काफी रोष में है। लोगों का कहना है कि भले ही सरकार कर्फ्यू लगाकर उन्हें कोरोना वायरस से बचा रही है, लेकिन उनकी जेबें ढीली हो रही हैं।
गृहिणी राधा ने कहा कि जैसे ही लॉकडाउन या कर्फ्यू खत्म होगा, बच्चों की नई क्लासों की एडमिशन करानी है, ऐसे में अगर ऐसे ही राशन व सब्जियों पर ज्यादा खर्च होता रहा, तो पैसे कहां बचेंगे। एडमिशन कहां से कराएंगे। सतनाम सिंह का कहना है कि अगर हम हेल्पलाइन नंबर पर इसकी कंपलेंट करने को फोन करते हैं, तो या तो कोई उठाता नहीं, अगर उठाते हैं, तो गलत नंबर कहकर काट दिया जाता है। ऐसे में हम आम लोग कहां जाएं। उधर, डीसी लगातार कह रहे हैं कि कालाबाजारी किसी भी कीमत पर होने नहीं दी जाएगी। अगर कोई दुकानदार ज्यादा रेटों पर चीजें बेचेगा, तो कार्रवाई होगी।