चंडीगढ़। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मद्रास ने रविवार सुबह संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) एडवांस 2024 के परिणाम घोषित कर दिए। परीक्षा में चंडीगढ़ के वेदांत सैनी ने ऑल इंडिया 14वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी टॉप किया। 68वीं रैंक के साथ मयंक जैन ट्राइसिटी टॉपर सूची में दूसरे और 124वीं रैंक के साथ आयुष गंगाल ट्राइसिटी में तीसरे स्थान पर रहे। बता दें कि इस बार जेईई एडवांस का परिणाम पिछले वर्ष से बेहतर रहा। पिछले साल 43769 विद्यार्थियों ने जेईई एडवांस की परीक्षा पास की थी, वहीं इस बार आंकड़े में 4479 अंकों की बढ़त कुल 48248 विद्यार्थी पास हुए हैं। इस बार जेईई एडवासं के पेपर एक और दो की परीक्षा 180200 विद्यार्थियों ने दी थी। आईआईटी एनआईटी में प्रवेश के लिए होने वाली जॉइंट सीट अलॉक्शन अथॉरिटी काउंसलिंग (जोशा काउंसलिंग 2024) 10 जून से शुरू होगी। यह काउंसलिंग 10 जून से 26 जुलाई के मध्य पांच राउंड में होगी।
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जेईई मेन में थी 26वीं रैंक, एडवांस में रंग लाई वेदांत की मेहनत
पहले जेईई मेन में ऑल इंडिया 26वीं रैंक लाने वाले वेदांत सैनी ने जेईई एडवांस में 360 में से 325 अंक प्राप्त कर 14वीं रैंक हासिल की है। सेक्टर-27 स्थित भवन विद्यालय से पासआउट वेदांत के माता-पिता दोनों डॉक्टर हैं। पिता डॉ. शिव कुमार सैनी पीजीआई और मां विदूषी महाजन जीएमसीएच-32 में डॉक्टर हैं। पिता ने बेटे की उपलब्धि पर कहा कि बचपन से ही गणित वेदांत का पसंदीदा विषय रहा है। विषय से जुड़ाव होने से 11वीं में ही उसने जेईई के लिए मन लगाकर तैयारी शुरू कर दी थी। पढ़ाई के साथ उसने व्यायाम के लिए भी समय निकाला। रोजाना शाम को वह कोई न कोई खेल जरूर खेलता है। पेपर के दिन नजदीक आने पर भी वह जॉगिंग पर जाता रहा। वहीं, वेदांत ने अच्छी रैंकिंग के पीछे निरंतर पढ़ाई की बात कही। कहा कि जितना भी पढ़ा मन लगाकार पढ़ा और पढ़ाई में हमेशा निरंतरता बनाए रखी।
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मयंक दो साल तक फोन से रहे दूर, सात-आठ घंटे रोज की पढ़ाई
ऑल इंडिया 68वीं रैंक हासिल कर ट्राइसिटी में दूसरा स्थान पाने वाले मयंक जैन के पिता अभिषेक जैन ने बताया कि उनका बेटा परिवार से इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाला पहला सदस्य होगा। बताया कि मयंक ने दो साल तक रोजाना सात-आठ घंटे पढ़ाई की और फोन से दूरी बनाए रखा। मयंक ने जेईई मेन ऑल इंडिया रैंक 308वीं रैंक हासिल की थी। एडवांस में उन्होंने रैंक में बड़ा सुधार किया। मनीमाजरा के गुरुकुल ग्लोबल स्कूल से पासआउट मयंक ने तैयारी करते समय खुद पर भरोसा रखने को अहम बताया। पिता अभिशेक जैन बिजनस करते है और मां पूजा जैन गृहिणी हैं। मयंक आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करना चाहते हैं।
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नौवीं-दसवीं से ही आयुष ने शुरू कर दी थी जेईई की तैयारी
नौवीं-दसवीं में पढ़ाई करते समय ही आयुष गंगाल ने आईआईटी से पढ़ाई का लक्ष्य तय कर लिया था। सेक्टर-27 के भवन विद्यालय से पासआउट आयुष ने ऑल इंडिया 124वीं हासिल की है। पिता सौरभ गंगाल ने बताया आयुष 14-15 घंटे तक भी पढ़ाई करता रहता था। ओलंपियाड में भाग लेने से गणित, विज्ञान विषयों में रुचि के चलते उसकी तैयारी अच्छे से हुई। जेईई की परीक्षा भी मेहनत कर दी और बेटे की मेहनत रंग भी लाई। पहले आयुष का इरादा आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करने का था लेकिन अब दिल्ली, कानपुर या चेन्नई से पढ़ाई करने का विकल्प भी देख रहा है। आयुष के पिता सौरभ गंगाल शिक्षक हैं और मां नीलिमा गंगाल योग प्रशिक्षक हैं।
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मानसा के नमिष ने हासिल की ऑल इंडिया 22वीं रैंक
जेईई मेन में नमिष की ऑल इंडिया 1237वीं रैंक आई थी लेकिन जेईई एडवांस में उन्होंने कमाल दिखाते हुए 22वीं रैंक हासिल की है। पिता विनय ने उनकी उपलब्धि पर कहा कि मेन का परिणाम आने पर बेटे ने उनसे वादा किया था कि एडवांस में वह दो अंकों में रैंक लाकर दिखाएगा और आज उसने अपना वादा पूरा कर दिया। मानसा जिला के बरेटा गांव निवासी नमिष मोहाली से जेईई की कोचिंग ले रहे थे। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरित होकर ही नमिष ने इंजीनियरिंग करने की ठानी और जेईई एडवांस में 360 में 321 नंबर प्राप्त किए। पिता ने बताया कि नौवीं में ने मनिष ने आईआईटी मुंबई से इंजीनियरिंग की पढ़ाई का सपना देखा था।
बठिंडा के आदेशवीर ने पहले प्रयास में पाई 44वीं रैंक
बठिंडा के मौड़ मंडी के रहने वाले आदेशवीर सिंह ने मोहाली से जेईई की कोचिंग ली और पहले प्रयास में ही ऑल इंडिया 44वीं रैंक हासिल कर ली। आदेशवीर ने बताया दो साल से उनका पूरा फोकस जेईई की तैयारी पर था। जेईई के अलावा इन दो सालों में उन्होंने कुछ और नहीं सोचा। घंटे के हिसाब से कभी पढ़ाई नहीं, बस लक्ष्य था कि पढ़ना है। रोजाना करीब 11-12 घंटे पढ़ाई की। कभी-कभी 15 घंटे भी पढ़ा। आदेशवीर की मां रुपिंदर कौर गृहिणी हैं।