चंडीगढ़। शहर में रविवार को गर्मी ने लोगों को काफी परेशान किया। पूरे दिन तेज धूप रही, जिसकी वजह से अधिकतम तापमान 42 डिग्री से भी ज्यादा दर्ज किया गया। गर्मी की वजह से कई अमृत सरोवर सूख चुके हैं और अब सुखना लेक का जल स्तर भी काफी नीचे आ गया है। रेगुलेटरी एंड पर मिट्टी नजर आने लगी है। जिस तरह से इन दिनों शहर में गर्मी पड़ रही है, उससे लगता है कि आने वाले कुछ दिनों में लेक का पानी और कम होगा। शहर में अभी बारिश होने के कोई संकेत नहीं है।चंडीगढ़ मौसम केंद्र के अनुसार, रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 42.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। रविवार को पड़ी गर्मी ने पिछले साल के जून महीने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। पिछले साल जून महीने में अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस तक ही पहुंचा था। रविवार को न्यूनतम तापमान 26.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य जितना ही रहा। पूरे दिन चंडीगढ़ में लू चली। फिलहाल इस गर्मी से राहत मिलने के आसार नहीं है। आने वाले दिनों में तापमान के फिर से 46 डिग्री तक पहुंचाने के आसार हैं। अब चंडीगढ़ में मानसून के आने तक लोगों को बारिश के लिए इंतजार करना पड़ेगा, जो इस महीने के आखिर में ही चंडीगढ़ में दस्तक दे सकता है।
आज भी भीषण गर्मी, चलेगी लू
चंडीगढ़ मौसम केंद्र ने सोमवार को भी भीषण गर्मी की चेतावनी जारी की है। इस दौरान दोपहर में लू चलेगी। पूरे दिन तेज धूप रहेगी जिसकी वजह से अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा सकता है। 12 जून को तापमान 45 डिग्री सेल्सियस और 13 जून को 46 डिग्री सेल्सियस तक भी पहुंच सकता है। बता दे कि मई महीने में भी तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। यह चंडीगढ़ के इतिहास का सबसे गर्म दिन था।
सुखना लेक को अच्छी बारिश का इंतजार
शहर की सुखना लेक का पानी अच्छी बारिश न होने के कारण काफी कम हो गया है। इसके रेगुलेटरी एंड पर काफी बड़े हिस्से का पानी सूख चुका है। मिट्टी नजर आने लगी है। लेक को अच्छी बारिश का इंतजार है ताकि कम हो रहे पानी का स्तर फिर उसी जगह पहुंच जाए, जहां यह पहले रहती है। लेक में पानी आने का मुख्य स्रोत पूरी तरह से बारिश का पानी है। इस साल बारिश नहीं होने के कारण इसके पानी में काफी कमी आ गई है। शहर में पिछले कई दिनों से जोरदार गर्मी पड़ रही है, जिसके कारण लेक का पानी कम होता जा रहा है। यही स्थिति बनी रही तो 2017 वाले हालात बन सकते हैं, जब लेक का अधिकतम पानी सूख गया था और बीच में से कई जगह नीचे की मिट्टी नजर आने लगी थी।