कुछ अफसर कंपनी को पालपोस रहे हैं तो कुछ अफसरों के कर्मचारी ठेकेदारी प्रथा से काम में लगे हैं। पिछले दिनों कुछ विभागों ने तो यह भी कहा था कि उनके यहां कर्मचारियों की जरूरत नहीं है लेकिन वहां भी ठेकेदारी प्रथा से लिए गए कर्मचारी भेज दिए।
ऐसे मिल रहा है पैसा
एमटीएस कंपनी अपने कर्मचारियों को पीयू में तैनात कर रहा है। हर कर्मचारी को 13000 रुपये मानदेय दिए जा रहा है। यह रकम कर्मचारी को सीधे न मिलकर ठेकेदारी प्रथा के जरिये मिलती है। यह प्रक्रिया लंबी है। यदि पीयू सीधे अपने कर्मचारियों की भर्ती करे तो उसमें योग्य कर्मचारी मिलेंगे और जिम्मेदारी वह पूरी समझेंगे। ठेकेदारी प्रथा के अंतर्गत ठेकेदार को जिम्मेदार समझा जाता है लेकिन कार्रवाई उस पर नहीं होती है।
पहले से कंपनी को काम मिल रहा है। अब जरूरत फिर महसूस हुई होगी तो फिर काम दिया गया होगा। मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है, इसके बारे में पता किया जाएगा। - प्रो. शंकरजी झा, डीयूआई
पीयू को योग्य कंपनी कोई नहीं मिल रही है, उसकी प्रक्रिया चल रही है, तब तक हमसे काम लिया जा रहा है। पीयू वीसी ने तीन माह के लिए डेली वेजेज कर्मचारी रखने के लिए फाइल मंजूर कर दी है। हमें खुद घाटा हो रहा है। - अनिल जैन, प्रोपराइटर, जैन एसोसिएट्स