चंडीगढ़। हिंदू पंचांग के अनुसार 10 जून को ज्येष्ठ अमावस्या है। इस दिन वट सावित्री व्रत, अमावस्या, सूर्य ग्रहण और शनि जयंती भी है। देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष व सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी ईश्वर चंद्र शास्त्री ने कहा कि ये चारों ही महत्वपूर्ण हैं। वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाएं अपने सुहाग और संतान की लंबी आयु के लिए रखती हैं। वट वृक्ष की पूजा की जाती है। अमावस्या तिथि होने से पितरों के लिए तर्पण कार्य भी इसी दिन किया जाएगा। ज्येष्ठ माह की अमावस्या को शनिदेव का जन्म हुआ था। इस दिन को शनि जयंती के नाम से जाना जाता है।
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि अमावस्या तिथि पर इस बार 10 जून को साल का पहला सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। यह ग्रहण 5 घंटे का होगा और भारतीय समयानुसार दोपहर एक बजकर 42 पर शुरू होकर शाम छह बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगा। भारत में दिखाई न देने के कारण इसका सूतक भी नहीं होगा। इस वजह से सभी मंदिर व धार्मिक स्थल खुले रहेंगे एवं पूजा पाठ भी प्रतिदिन की भांति ही होंगे।
शनिदेव का व्रत करने से प्राप्त होगी उनकी कृपा
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि शनि पूजन से शनिदेव की कृपा प्राप्त की जा सकती है। शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनि जयंती पर शनि चालीसा का पाठ करें, शनिदेव का व्रत और उपासना पश्चिम की ओर मुंह करके करें। पूजा के दौरान तेल का दीपक काले तिल डालकर जलाएं। दान पुण्य का विशेष दिन होने के कारण इस दिन अपने आसपास के गरीबों को भोजन कराएं, वस्त्र आदि का दान करें। यदि घर के पास में ही पीपल का पेड़ हो तो वहां भी तेल का दीपक जलाएं। पीपल के पेड़ के नीचे ही शनि पूजन भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शनि जयंती पर बाल व नाखून नहीं काटना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से आर्थिक तरक्की रुक जाती है। अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।