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Chandigarh News: होली पर सिटी ब्यूटीफुल में देखने को मिल रहे विविध रंग

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फोटो सहित
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अलग-अलग प्रांतों से बसे यहां लोग अपने अंदाज में मना रहे होली का त्योहार
लोग बोले-भले ही वे अलग अलग प्रांतों के हो लेकिन उत्सव का रंग एक ही है- खुशी और एकता का

संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़। सिटी ब्यूटीफुल होली के रंग में रंग चुकी है। यहां विविध रंग देखने मिल रहे हैं। कहीं उत्तराखंडी अंदाज में हल्दी के टीके लगाकर तो कहीं भोजपुरी लोकगीतों के साथ होली खेल रहे हैं। अलग-अलग प्रांतों के लोग होली के दिन उसे अपने अंदाज में मनाकर शहर में विविधता में एकता का रंग घोल रहे हैं। लोगों को कहना है कि भले ही वे अलग अलग प्रांतों के हो लेकिन उत्सव का रंग सभी जगह पर एक ही है, खुशी और एकता का।
झांल-ढोलक बजाकर रातभर चलता है लोकगीतों का सिलसिला
बंगला में उड़ेला गुलाल....सिया निकले अवधवा के ओर... ऐसे ही कई लोकगीतों के साथ बिहार में होली का जश्न पूरा होता है। बिहार परिषद के अध्यक्ष सत्यम ओझा ने बताया दिनभर रंगों से होली खेलने के बाद शाम को लोकगीत गाने का सिलसिला शुरू होता है। झांल, ढोलक की थाप पर रात 12 बजे तक गाने-बजाने का सिलसिला चलता है और घरों में पुआ, ठेकुआ, पूड़ी और कटहल की सब्जी बनती है। सत्यम ने बताया कि चंडीगढ़ में भी उनकी परिषद की ओर से हर वर्ष होली मिलन का आयोजन होता है। इसमें बिहार के अलावा अन्य प्रदेशों के लोग भी उत्साह के साथ भाग लेते हैं।
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राजस्थानी समाज में देवर-भाभी की होली रहती है खास
खंडेलवाल समाज के प्रवक्ता सतीश ने बताया कि राजस्थान की होली में देवर-भाभी में होली खेलने की रस्म होती है। जिनकी नई शादी हुई हो उनके लिए उसका अनुभव बेहद खास होता है। डोलची में पानी के साथ रंग मिलाकर देवर-भाभी, जीजा-साली एक दूसरे पर रंग डालते हैं। उनकी हंसी-ठिठोली और मस्ती एक अलग ही आनंद देती है। गलियारों में दोस्तों की टोलियां निकलती है जो रंग बिखेरते हुए सबको रंग लगाते चलते हैं। मंदिरों में आरती के बाद मुख्य पुजारी लोगों पर गुलाल की बौछार करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मंदिर का गुलाल जीवन में खुशियां बिखेर देती है।
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उत्तराखंडी हल्दी, फुलड़ी फूल से मनाते हैं होली
उत्तराखंड महिला शक्ति संगठन की अध्यक्ष शांति ने बताया छह सात दिन पहले से ही होली खेलना शुरू कर देते है। इसमें फागुन के समय खिलने वाला फूल फुलड़ी और हल्दी के साथ होली मनाई जाती है। थाली बजाकर झंडा लहराकर सभी के घरों में जाकर होली खेलते हैं। पकवान में दाल के पकोड़े और स्वाले बनाते हैं। पारंपरिक रूप से गोबर के उपले पर पाती का फूल और घी डाल कर उसे जलाकर उसके धुएं से पूरे घर को शुद्ध किया जाता है।
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