अदालत के दखल के बिना ठेकेदारों को भुगतान न होने की अब प्रदेश में बन रही है प्रथा
हर सप्ताह निर्विवाद देय के 10-15 मामले अदालत पहुंचने पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ठेकेदारों के वैध व स्वीकार्य बिल रोकने को नियमित प्रथा बताते हुए हरियाणा सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए लोक निर्माण विभाग पर 50 हजार रुपये जुर्माना ठोका है। हाईकोर्ट ने कहा कि आप न्यायालय के हस्तक्षेप के बिना ठेकेदारों को देय भुगतान जारी नहीं करते हैं। शशि भूषण ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उसे मिला हुआ कार्य उसने तय समय में पूरा कर दिया था। काम पूरा होने के बावजूद उसे इसके लिए भुगतान नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के मांगपत्र पर तीन माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है। हालांकि अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि न्यायालय ठेकेदारों के वैध और स्वीकार्य बकाया को अनुचित तरीके से रोके रखने के प्रति प्रतिवादियों के कृत्य और आचरण के प्रति अपनी पीड़ा और चिंता व्यक्त करना चाहता है। हर सप्ताह औसतन 10-15 मामले निर्विवाद देय राशि जारी करने से जुड़े हाईकोर्ट में पहुंच रहे हैं। इन मामलों में देय राशि स्वीकार करने के बावजूद धन की कमी के चलते भुगतान नहीं होने की दलील दी जाती है। ठेकेदारों को अपनी ओर से कोई गलती न होने के बावजूद अपनी स्वीकार्य बकाया राशि की रिहाई के लिए इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ता है, जिससे उनका वित्तीय बोझ बढ़ता है और अनावश्यक मुकदमेबाजी होती है। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका को ही मांगपत्र मानकर तीन माह में इस पर निर्णय लेने का आदेश दिया है। साथ ही सरकार के रवैए पर कड़ा रुख अपनाते हुए लोक निर्माण विभाग पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। यह राशि पीजीआई चंडीगढ़ के गरीब रोगी कल्याण कोष में जमा करवाना होगा।