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जानकर अतिरिक्त पेंशन स्वीकार की तो रिकवरी से नहीं किया जा सकता इन्कार: हाईकोर्ट

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-नागरिक अधिकारों का दावा करते हैं लेकिन कर्तव्य निर्वहन के लिए कोई तैयार नहीं
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-कर्मचारी की विधवा की अतिरिक्त भुगतान की रिकवरी के खिलाफ याचिका खारिज

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि पेंशनभोगी उचित जानकारी के बावजूद अधिक राशि स्वीकार करता है तो न केवल उक्त राशि बाद में वसूल की जा सकती है, बल्कि राशि की वसूली पर आपत्ति भी स्वीकार्य नहीं है।हाईकोर्ट में हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी हुकुम चंद की विधवा तारावंती की याचिका सुनवाई के लिए पहुंची थी। याची ने बताया कि उसका पति सन 2000 में रिटायर हुआ था और 2001 में उसकी मौत हो गई थी। पेंशन भुगतान आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता को सूचित किया गया कि पारिवारिक पेंशन बढ़ी हुई दर 12 मई 2001 से 11 मई 2008 तक देय होगी तथा उसके बाद 12 मई 2008 से सामान्य दरों पर भुगतान होगा। अनजाने में याचिकाकर्ता को 31 अगस्त 2021 तक बढ़ी हुई पेंशन मिलती रही, जिससे उसे पात्रता से अधिक 6,22,520 रुपये भुगतान हो गया। ऐसे में उसे इस राशि की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया और इसी को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची ने कहा कि उसने कोई गलत बयान नहीं दिया न कोई धोखा दिया, ऐसे में उससे वसूली नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक अधिकार का दावा करता है, लेकिन कोई भी दायित्व का निर्वहन करने के लिए तैयार नहीं है। एक बार जब नागरिक को पता चल जाता है कि उसे उसके हक से अधिक राशि का भुगतान किया जा रहा है, तो उसे दिए गए उक्त अतिरिक्त भुगतान को संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाया जाना चाहिए था। याची को पेंशन के बारे में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी गई थी लेकिन इसके बावजूद उसने अतिरिक्त भुगतान के बारे में अधिकारियों को सूचित नहीं किया।
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