हरियाणा सरकार ने रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ लैंड डील की जांच करने वाले ढींगरा आयोग का कार्यकाल भले ही बढ़ा दिया हो, लेकिन सियासत हलकों में आयोग का समय बढ़ाने को लेकर द्वंद्व छिड़ गई है। इसी बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल के ताजा बयान से साफ हो गया है कि कांग्रेसी नेताओं के नाम रिपोर्ट में आ चुके हैं।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने यहां कहा है कि गुड़गांव में जारी किए गए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की जांच के लिए गठित जस्टिस एसएन ढींगरा आयोग की कार्यावधि बढ़ाए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस के नेताओं की ओर से उठाए जा रहे सवालों से प्रतीत होता है कि दाल में कुछ काला है। उन्हाेंनेे कहा कि ढींगरा आयोग का गठन एक वर्ष पहले किया गया था तब कांग्रेस को कोई आपत्ति नहीं थी। इससे पूर्व भी इस आयोग का कार्यकाल बढ़ाया गया था और स्वीकृति को 10 दिन बाद अधिसूचित किया गया था। उस समय भी किसी को आपत्ति नहीं थी। अब आयोग ने छह सप्ताह का समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने दो माह का समय बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तथ्यों की सही जानकारी तो रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगी। आयोग की रिपोर्ट आने से पहले ही सवाल उठाना इस बात की ओर इशारा करता है दाल में कुछ काला है।
उधर, आयोग के पास एक और सेल डीड का बंडल पहुंच चुका है। जस्टिस ढींगरा द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में साफ है कि वह अपनी जांच पूरी कर चुके थे और रिपोर्ट तैयार थी। वीरवार को उन्होंने यह रिपोर्ट सरकार को सौंपने की तैयारी भी कर ली थी। इसी दौरान एक व्यक्ति उनके पास आया और सेल डीड का एक बंडल उन्हें दे दिया।
जस्टिस ढींगरा के अनुसार पत्र देने वाले व्यक्ति का दावा था कि इन दस्तावेजों के माध्यम से लाइसेंसी का लाभ मिला है। इस तर्क के आधार पर जस्टिस ढींगरा को संदेह हुआ और उन्होंने प्रारंभिक जांच में इस बात का आभास हुआ कि इन दस्तावेजों पर गंभीरता से विचार करते हुए जांच करने की जरूरत है।